JK: आयरन की गोलियां बनी 'आफत' की गोलियां
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आयरन की गोलियों के ओवरडोज से दो बच्चों की कथित मौत के बाद एक बार फिर से सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को दी जा रही आयरन गोली पर सवाल उठे हैं। शिक्षकों को मिड-डे-मील के साथ विद्यार्थियों को आयरन की गोली खिलाने के निर्देश दिए गए हैं।
जबकि शिक्षक विद्यार्थियों को एक साथ कई गोलियां घर ले जाने के लिए दे रहे हैं। सोमवार को चीफ एजूकेशन आफिसर ने जेडईओ के साथ बैठक करके आयरन गोली वितरण प्रणाली को लेकर समीक्षा की और जरूरी कदम उठाने के दिशा-निर्देश दिए।
2014 में उधमपुर में आयरन गोली के ओवर डोज से बच्चे की कथित मौत का मामला सामने आया था। इसमें भी शिक्षकों ने आयरन की गोलियां विद्यार्थियों को घर ले जाने को दी थीं। अब 2015 में रविवार को रामबन में दो बच्चों की मौत का मामला सामने आया है।
इसमें भी आयरन की गोली के ओवर डोज की बात कही जा रही है और शिक्षकों ने आयरन की गोलियां विद्यार्थियों को घर ले जाने के लिए दी थीं। शिक्षा विभाग ने दोनों स्कूलों के हेडमास्टर को निलंबित करके कार्रवाई तो कर दी है, लेकिन अन्य जिलों में शिक्षा विभाग इसको लेकर सतर्क हो गया है।
घर ले जाने के लिए बच्चों को नहीं देनी होगी डोज
सोमवार को जम्मू सहित कई जिलों में सीईओ ने जोनल एजूकेशन आफिसर्स के साथ बैठक करके आयरन गोली के वितरण से संबंधित जानकारी हासिल की। सीईओ ने जोनल एजूकेशन आफिसर्स से कहा कि विद्यार्थियों को आयरन की गोली सप्ताह में दो या तीन दिन मिड-डे-मील के साथ ही दी जाए।
किसी भी विद्यार्थी को घर ले जाने के लिए आयरन की गोली नहीं दी जाए। शिक्षकों को आयरन गोली के वितरण को लेकर पूरी तरह से सतर्क रहने को कहा जाए।
चीफ एजूकेशन अफसर जम्मू जेके सूदन ने बताया कि जब यह योजना शुरू की थी तो शिक्षकों को आयरन की गोली वितरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग की तरफ से प्रशिक्षण दिया गया था। शिक्षकों को विद्यार्थियों को आयरन की गोली स्कूल में मिड-डे-मील के साथ ही देनी है। आज भी बैठक करके जेडईओ यही निर्देश दिए गए हैं।
जीएमसी के अधीक्षक डा. रविंद्र रतन पाल ने बताया कि आयरन की गोली के ओवर डोज से बच्चे की एकदम मौत नहीं हो सकती है। इसके अलावा एक्सपाइरी आयरन की गोली से बच्चे की सेहत पर असर नहीं होता है। एक्सपाइरी होने पर आयरन की गोली में आयरन की क्षमता कम हो जाती है और इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता है।