फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   news story on ashiq hussain faktoo

एकमात्र ऐसा कश्मीरी आतंकी, जिसने जेल से की पीएचडी

Fri, 20 Nov 2015 11:21 AM IST
Updated Fri, 20 Nov 2015 11:21 AM IST
विज्ञापन
news story on ashiq hussain faktoo

जमायत-उल-मुजाहिदीन (जेएम) का पूर्व कमांडर व अलगाववादी विचाराधारा से प्रेरित आशिक हुसैन फक्तू मानवाधिकार आयोग कार्यकर्ता की हत्या में उम्रकैद की सजा काट रहा है।

विज्ञापन


फक्तू एकमात्र ऐसा कश्मीरी आतंकी है जिसने हिरासत में रहने के दौरान पीएचडी की डिग्री हासिल की थी। फक्तू ने वर्ष 1990 में अपने से पांच साल बड़ी अलगाववादी नेता सईदा आसिया अंद्राबी से शादी की थी। इनका बच्चा भी तीन वर्ष तक अपने माता-पिता के साथ जेल में रह चुका है।

विज्ञापन

कई सालों से जेल में बंद

news story on ashiq hussain faktoo

क्या टाडा के तहत दर्ज इकबालिया बयान के आधार पर किसी को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा दी जा सकती है? सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ इस पहलू पर गौर करेगी।

सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने इस मामले को अब संवैधानिक पीठ के पास भेज दिया है। यह कानूनी मसला जम्मू- कश्मीर में सबसे लंबे समय से जेल में बंद आशिक हुसैन फक्तू के मामले में उठ खड़ा हुआ है।

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मसले पर विचार करने की जरूरत है। संवैधानिक पीठ यह भी निर्धारित करेगी कि क्या सुप्रीम कोर्ट द्वारा सजा पर मुहर लगाने के बाद फिर से उसकी सजा को लेकर सुनवाई होनी चाहिए या नहीं।

फक्तू को वर्ष 2001 में जम्मू की अदालत ने बरी कर दिया था

news story on ashiq hussain faktoo

करीब 22 सालों से श्रीनगर सेंट्रल जेल में बंद फक्तू को वर्ष 2001 में जम्मू की अदालत ने बरी कर दिया था, लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश को पलट दिया था और फक्तू को दोषी ठहराया था। हालांकि, बाद में शीर्ष अदालत फक्तू की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा पर फिर से विचार करने के लिए तैयार हो गई।

दो सदस्यीय पीठ ने केंद्र सरकार की इस दलील को नकार दिया था कि दोषसिद्धि के आदेश को रिट पीटिशन के द्वारा चुनौती नहीं दी जा सकती।

पीठ ने कहा कि फक्तू की ओर से वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी द्वारा उठाए गए पहलू पर गौर करने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे पुनर्विचार याचिका में तब्दील कर ओपन कोर्ट में सुनवाई करने का निर्णय लिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed