सूर्यपूत्री तवी की इस हालत के जिम्मेदार आप हैं
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जब भी कोई त्योहार होता है तो सूर्य पुत्री की पूजा की जाती है। नवरात्र खत्म होने पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु सूर्य पुत्री की पूजा करते हैं, लेकिन पूजन के साथ ही पूजा सामग्री व पालीथिन को नदी में ही डाल दिया जाता है।
मछली पालन हो रहा प्रभावित
तवी नदी में दिन ब दिन बढ़ रहे प्रदूषण के कारण मछली पालन काफी प्रभावित हुआ है। 141 किलोमीटर लंबी तवी नदी में कई स्थानों पर ट्राउट मछली का पालन किया जाता है, लेकिन गंदगी के कारण मछली पालन पर असर पड़ने लगा है। नदी में डाला जा राह पालीथिन मछली पालन पर असर डाल रहा है।
लगातार दूषित हो रही सूर्यपूत्री तवी
शहर की शान सूर्य पुत्री तवी नदी दिन ब दिन प्रदूषित होती जा रही है। तवी नदी में हर रोज शहर की गंदगी डाली जा रही है। गंदगी में सबसे ज्यादा पालीथिन होती है। तवी में बढ़ रहे प्रदूषण के कारण मछली पालन पर भी लगातार असर पड़ रहा है।
तवी को प्रदूषण से बचाने की जिम्मेवारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व पर्यावरण विभाग की है, लेकिन दोनों विभाग केवल जागरूकता अभियान तक ही सीमित हैं। अध्यात्म के हिसाब से तवी नदी राज्यवासियों के लिए बहुत ज्यादा महत्व रखती है।
इतिहास में इसको सूर्य की बेटी भी कहा जाता है। शहर के बीच से गुजरने के कारण इसकी सुंदरता देखते ही बनती है। लेकिन, अब गंदगी के कारण इसकी सुंदरता को ग्रहण लगना शुरू हो गया है।
जम्मू शहर के अलावा नगरोटा में भी गंदगी को तवी नदी के किनारे पर जमा किया जाता है। यही गंदगी जब नदी में पहुंची है तो पानी प्रदूषित हो जाता है।
शहर के कई स्थानों पर सर्विस सेंटर की गंदगी को भी तवी नदी में डालकर प्रदूषित किया जा रहा है। इसके अलावा केमिकलवेस्ट में भी तवी में डाला जा रहा है।