कश्मीर में पाकिस्तान की दोहरी चाल, पढ़ें खबर
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पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। घाटी को लगातार अशांत करने की साजिशें करने में जुटा है। अलगाववादियों को आगे कर घाटी में माहौल बिगाड़ने की साजिशें भी कर रहा है और खुद को पाक साफ साबित करने के लिए दो पक्षीय वार्ता का बेसुरा राग भी अलाप रहा है।
वहीं, हाफिज सईद और सलाहुद्दीन जैसे आतंकियों को खुली छूट दे रखी है। ताजा इनपुट यह हैं कि सीमा से लगे इलाकों में गोलाबारी कर केंद्र तथा रियासती सरकार का ध्यान भटकाया जाए ताकि अलगाववादी घाटी में कश्मीरियों को एकजुट करने के अपने मिशन में सफल हो सकें।
साथ ही गर्मियों का सीजन शुरू होने के साथ ही बर्फ पिघलना शुरू हो गई है। पाकिस्तान इसका भी लाभ उठाना चाहता है। ताकि आतंकियों की घुसपैठ कराकर सैन्य तथा पुलिस ठिकानों को निशाना बनाया जा सके। एक सप्ताह में सीमा पार से सीजफायर उल्लंघन की चार घटनाओं को पाकिस्तानी रेंजरों द्वारा अंजाम दिया चुका है।
मसर्रत ने एक माह में ही कराया बवाल
कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास की बात शुरू होते ही घाटी में अलगाववादियों ने फिर से अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। गिलानी की रैली के बाद इसने और जोर पकड़ा है। मुफ्ती सरकार में मसर्रत की रिहाई के बाद यह आशंका जताई गई थी कि वह घाटी में दोबारा अलगाववाद की जड़ों को मजबूत करने में जुटेगा।
हुआ भी वही। एक महीने के भीतर ही उसने कश्मीरी हुजूम के साथ घाटी में पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाए। कश्मीरी समुदाय को भारत के खिलाफ भड़काया। पाकिस्तान को अपना सच्चा दोस्त बताते हुए भारत के खिलाफ जहर उगलने से भी अलगाववादी नहीं चूक रहे हैं।
इसके लिए युवाओं को खासकर टारगेट किया जा रहा है। घाटी में लंबे समय तक तनाव कायम रखने की साजिश के तहत ही सोमवार को अलगाववादी नेता नारबल में उस युवक के घर पहुंचे जिसकी विरोध प्रदर्शन के दौरान फायरिंग में मौत हो गई थी।
जम्मू में आतंकी हमले के इनपुट
घाटी में बवाल के साथ ही जम्मू संभाग में सैन्य तथा पुलिस ठिकानों पर हमले के खुफिया इनपुट हैं। दो दिन पहले लेफ्टिनेंट जनरल केएच सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया था कि आईएसआई तथा आतंकी संगठन घुसपैठ कराने की फिराक में हैं।
निशाने पर सेना तथा पुलिस कार्यालय हैं। इसके साथ ही घाटी में घुसपैठ में विफल रहने से बौखलाए आतंकी संगठनों के आकाओं ने रणनीति बदलते हुए घाटी में सक्रिय आतंकियों को ही हमले के लिए आगे किया है।
हालांकि सेना का कहना है कि उसके जवान किसी भी हमले से निपटने के लिए तैयार हैं।