फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   new place of vaishno devi temple

यहां जाए बिना पूर्ण नहीं होगी वैष्णो देवी की यात्रा

Wed, 01 Oct 2014 12:43 PM IST
Updated Wed, 01 Oct 2014 12:43 PM IST
विज्ञापन
new place of vaishno devi temple

श्रद्धा और आस्था से परिपूर्ण वैष्णो देवी की यात्रा को जाने वाले हर श्रद्धालु की अभिलाषा होती है कि वह हर उस स्थान पर नमन करते हुए माता के दरबार तक पहुंचे, जहां पर कभी मां भगवती ने विश्राम किया था। कोल कंडोली, देवा माई, भूमिका मंदिर, दर्शनी ड्योढ़ी, बाण गंगा, चरण पादुका, अर्द्धकुंवारी हाथी मत्था, भैरों मंदिर आदि ऐसे पड़ाव हैं, जो वैष्णो देवी यात्रा का प्रमुख हिस्सा हैं।

विज्ञापन


लेकिन मौजूदा समय में अनदेखी के चलते इनमें से अधिकतर पड़ाव अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं। पौराणिक कथा के अनुसार जब मां वैष्णो देवी ने कन्या के रूप में भैरो का वध किया था तो उसे वरदान में कहा गया कि जो भक्त मां वैष्णो के दर्शन के बाद भैरो मंदिर में माथा नहीं टेकेगा, उसकी यात्रा सफल नहीं होगी।
विज्ञापन


जबकि मौजूदा समय में मात्र 30 प्रतिशत तक ही दर्शनार्थी भैरों दर्शन के लिए जाते हैं। अधिकतर यात्रियों को भैरों मंदिर की महत्ता के बारे में जानकारी भी नहीं होती। अथवा कई को नए मार्ग से होते हुए अर्द्धकुंवारी पहुंचने पर ज्ञात होता है कि भैरों मंदिर का रास्ता दूसरी ओर से जाता है। ऐसे भक्तों को ना चाहते हुए भी भैरों मंदिर के दर्शन की इच्छा का त्याग करना पड़ता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

बाण गंगा में स्नान का महत्व

new place of vaishno devi temple

वेदों के अनुसार प्राचीन समय में बाण गंगा में स्नान करने के बाद ही श्रद्धालु आगे की यात्रा शुरू करते थे। जबकि मौजूदा समय में बाण गंगा के कम हुए जलस्तर और बढ़ते प्रदूषण ने इस प्रथा को भी लगभग समाप्त कर दिया है। इसी प्रकार से चरण पादुका अर्द्धकुंवारी आदि के दर्शन का भी विशेष महत्व माना जाता है।

वैष्णो देवी की कथा के अनुसार प्राचीन दर्शनी ड्योढ़ी पर मां वैष्णो ने कन्या रूप में परम भक्त श्रीधर को दर्शन दिए थे। जबकि मौजूदा समय में पांच प्रतिशत तक ही यात्री इस स्थान से गुजरते हैं तथा बाण गंगा मार्ग से होते हुए सीधे दर्शन को निकल जाते हैं। बहुत कम संख्या में यात्री इन स्थानों तक पहुंचते हैं।

एक ओर भवन तक पहुंचने के लिए नए मार्गों की स्थापना और आधुनिकीरण भी इन पड़ाव के अस्तित्व के समापन को लेकर जिम्मेदार है। विभिन्न माध्यम से यात्री सीधे भवन पहुंचने लगे हैं, जिससे यात्रा मार्ग के पड़ावों से भक्त अंजान होने लगे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed