फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   nature's havoc on the border villages

पाक का सितम, फिर कुदरत का कहर

Wed, 10 Sep 2014 02:49 PM IST
Updated Wed, 10 Sep 2014 02:49 PM IST
विज्ञापन
nature's havoc on the border villages

भारतीय सीमा से सटे गांव हमीरपुर कोना के लोग पहले पाक गोलीबारी का दंश झेल रहे थे और अब बाढ़ ने उन्हें बेघर कर दिया है। गांव के सैकड़ों परिवारों पर बाढ़ ने आफत ढाई है।

विज्ञापन


गांव पूरी तरह से कट गया है। खेत खलिहान कहीं नहीं दिखाई पड़ते हैं। खेतों में लगाए गई मोटरों का तो नामोनिशान खत्म हो गया है। गांववासियों के तीन सौ से ज्यादा मवेशी बाढ़ में बह गए।
विज्ञापन


कमोबेश यही हालात आरएसपुरा सेक्टर के भी हैं जहां मूसलाधार बारिश से धान की फसल खराब हो गई है। वहीं प्रशासन का अभी तक इस पर ध्यान नहीं है। इससे किसानों में रोष है। आरएस पुरा का बासमती चावल काफी प्रसिद्ध है।
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन, यहां के किसानों की सुध नहीं ली जा रही। पहले पाकिस्तान द्वारा अकारण फायरिंग के चलते खेतीबाड़ी प्रभावित हुई। जब सबकुछ पटरी पर लौटने लगा तो कुदरत ने कहर ढाना शुरू कर दिया।

छोटे-छोटे बच्चे के ल‌िए पीने तक को दूध तक नहीं

nature's havoc on the border villages

मुसीबत का आलम यह है कि न सिर पर छत है और न ही जेब में कोई पैसा। दो जोड़ी कपड़ों के सिवाय लोग घरों से कुछ भी नहीं निकाल पाए और बेघर हो गए। बर्तन, बिस्तर, सामान कुछ नहीं बचा।

आनन-फानन में जैसे-तैसे छतों पर पहुंचे लोगों को सेना के हेलीकाप्टर द्वारा ज्यौड़ियां के गांव चक मलाला स्थित कम्यूनिटी हाल लाकर छोड़ा गया। खुद की जान बचाकर आए लोग जिंदा बचे हुए मवेशियों को गांव में ही छोड़ आए हैं।

लोगों को यहां रहने का आश्रय, दो वक्त की रोटी, पानी, चिकित्सा आदि की सुविधा तो मिल रही है लेकिन परेशानी यहीं खत्म नहीं हो रही है। परिवारों में आठ महीने से लेकर दो वर्ष तक के छोटे-छोटे बच्चे हैं।

दूध से लेकर कपड़े तक हर जरूरत के लिए लोग एक-दूसरे का मुंह ताक रहे हैं।  कम्यूनिटी हाल में 180 परिवार आश्रय लिए हुए हैं, जिनमें 250 महिलाएं और बच्चे हैं, जबकि 150 से ज्यादा परिवार अभी हमीरपुर के साथ लगते गांवों में फंसे हैं।

दिल के आरमानों पर फिर गया पानी

nature's havoc on the border villages

तीन महीने बाद पूजा की शादी है। अरमानों से सहेजा शादी का सामान बाढ़ के पानी में बह गया। घर में कुछ भी नहीं बचा। उसकी मां पोली देवी ने बड़े चाव से उसके लिए डोगरी सूट बनाया था पर पूजा की शादी का जोड़ा भी पानी की भेंट चढ़ गया। पूजा के पापा रतन लाल कहते हैं कि गरीब पर खुदा की मार पड़ी है।

ठेके पर ली जमीन बह गई

पंजाब के साधु सिंह पिछले सात वर्षों से परिवार के साथ हमीरपुर में रह रहे हैं। ठेके पर जमीन लेकर सब्जियां लगाने का काम करने वाला परिवारों की सारी जमीन पानी में बह गई। कमाई का साधन गया, साथ ही की र्हुई कमाई को भी बहा कर ले गया। जमीन की किश्त देने के लिये रखे पैसे बाढ़ में बह गए।

चौथी बार ऐसा हुआ है

85 वर्षीय शंकरी देवी की बूढ़ी आंखों ने चौथी बार बर्बादी का यह मंझर देखा है। कंपकंपी आवाज में वह कहती हैं, गोलियों की गड़गड़ाहट की तो जैसे आदत सी हो गई कानों को लेकिन लगता है अब पानी के कहर की भी आदत डालनी होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed