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Jammu News: राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस आज, पहाड़ी इलाकों में डॉक्टरों की कमी

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national doctors day
अमर उजाला ब्यूरो
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जम्मू। जम्मू कश्मीर में नए मेडिकल कॉलेजों का निर्माण होने के बाद मौजूदा एमबीबीएस सीटें 1100 से अधिक हो गई हैं, लेकिन डॉक्टरों की कमी को पूरा नहीं किया जा सका। इस कारण दूरदराज के मरीज अव्यवस्था का दर्द झेलने के लिए मजबूर हैं। एक जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर जहां डॉक्टरों को उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मान दिया जाएगा, वहीं प्रदेश में चिकित्सा सुविधा का हालात खराब है। जम्मू संभाग की ही बात करें तो दस जिलों में स्वास्थ्य विभाग के अधीन चिकित्सा केंद्रों में सृजित 2043 पदों में 32 प्रतिशत खाली हैं। इनमें सबसे अधिक मेडिकल अफसर (डॉक्टर) के हैं। इसी तरह स्पेशलिस्ट की भी कमी है।
संभाग में 650 डॉक्टर नहीं हैं। मेडिकल अफसर के 1390 में से 500 पद भरे नहीं गए। स्वास्थ्य विभाग के अधिकांश चिकित्सा केंद्रों में मेडिकल अफसरों की ही तैनाती की जाती है। पिछले एक दशक से अधिक समय से नए डेंटल सर्जनों के पद भी सृजित नहीं किए गए, जिससे हर साल नए डेंटल सर्जन बेरोजगार हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधीन 170 सृजित डेंटल सर्जनों के सभी पद भरे हैं। स्पेशियलिटी पदों में दशकों से नए पद सृजित नहीं किए गए। मसलन संभाग में पांच ही त्वचा विशेषज्ञ के पद सृजित हैं। इसमें गांधीनगर अस्पताल, डीएच पुंछ, रामबन और उधमपुर अस्पताल में विशेषज्ञ तैनात हैं, जबकि अन्य किसी भी जिले में त्वचा का इलाज नहीं मिल रहा। वहां फिजिशियन से ही काम चलाया जा रहा है।
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स्पेशियलिटी में 464 में से 155 पद खाली
फिजिशियन, एनेस्थेसिस्ट (बेहोशी) आदि विशेषज्ञ डॉक्टरों की भी किल्लत बनी हुई है। स्पेशियलिटी में 464 के करीब सृजित पद हैं, जिसमें 33 प्रतिशत की कमी से 155 पद खाली हैं। संभाग के दूरवर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों में खासतौर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को छोटे से उपचार के लिए भी जम्मू के अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। प्रदेश में जो स्पेशलिस्ट तैयार होते हैं वे अधिकांश या तो दूसरे राज्यों के अस्पतालों या निजी अस्पतालों में चले जाते हैं। इसका बड़ा कारण निजी क्षेत्र में विशेषज्ञों को सरकारी ढांचे की तुलना में अधिक वेतन व अन्य सुविधाएं मिलना है।
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