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नेकां और पीडीपी करने लगी कश्मीरी भावना की बात

Fri, 28 Nov 2014 12:40 AM IST
Updated Fri, 28 Nov 2014 12:40 AM IST
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national conference to remain committed to its agenda of internal autonomy

प्रथम चरण में 15 सीटों पर मतदान के बाद कश्मीर की स्वायत्ता का मुद्दा फिर से गरम हो रहा है। नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी दोनों कश्मीरी दल इस मुद्दे को हवा दे रहे हैं। कश्मीर में पैठ बनाने की कोशिश में जुटी भाजपा ने अनुच्छेद 370 हटाने के मुद्दे को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है, लेकिन कश्मीरी पार्टियां इस मुद्दे पर अब भी मुखर हैं।

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चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद विकास तमाम मुद्दों में सबसे ऊपर था। भाजपा और कांग्रेस के एजेंडे में रोजगार और विकास को सबसे अधिक अहमियत दी गई, लेकिन भाजपा का रथ रोकने के लिए कश्मीरी दल फिर से उन मुद्दों को हथियार बना रहे हैं, जो अलगाववादी मानसिकता को सहलाती हैं।
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इस चुनाव में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को चौतरफा कड़ी चुनौती मिल रही है। उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला इलाज के सिलसिले में लंदन में हैं। इस कारण पुराने दिग्गजों में से कुछ ने बगावत का झंडा उठा लिया और कुछ ने दूसरे दलों का दामन थाम लिया।
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कश्मीर में भ्रष्टाचार के लिए उमर सरकार को सीधा जिम्मेदार ठहराकर कठघरे में खड़ा किया। भाजपा और पीडीपी की चुनौती के अलावा उमर को उस कांग्रेस के भी हमले झेलने पड़ रहे हैं जो पूरे छह साल तक उनकी गठबंधन सरकार की हिस्सेदार रही है।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और बाद में उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार की विफलता का ठीकरा उमर के माथे ही फोड़ा है। उमर अपनी पार्टी में एकमात्र वोट खींचने की क्षमता वाले नेता हैं। चौतरफा हमले के बाद उमर ने तेवर सख्त किए और अब वह लगभग हर सभा में कश्मीर की स्वायत्तता का मुद्दा उठाने लगे हैं।

भाजपा ने 370 छोड़ा पर क्षेत्रीय दलों का यह अब भी मुद्दा

national conference to remain committed to its agenda of internal autonomy

नेशनल कांफ्रेंस के चुनावी घोषणा पत्र में भी कश्मीर की स्वायत्तता को फिर से जगह मिल गई है। उमर अब अवाम की इच्छा से कश्मीर समस्या के समाधान की बात करने लगे हैं। बांडीपोरा और सोनावार में उन्होंने कहा कि कश्मीरियों की इच्छा के अनुरूप ही समाधान की बात कही।

नेकां के महासचिव अली मोहम्मद सागर कहते हैं कि स्वायत्तता 2008 के चुनावी घोषणा पत्र में भी था। नेकां ने इस मुद्दे को कभी नहीं छोड़ा। यह कश्मीर समस्या का एकमात्र समाधान है। यह समाधान के लिए संगे बुनियाद की भूमिका निभा सकता है। नेकां अलगाववाद की बात नहीं करती। हम भारतीय संविधान के दायरे में ही स्वायत्तता चाहते हैं।

नेकां द्वारा स्वायत्तता के मुद्दे को हवा देने के बाद पीडीपी भी इस मुद्दे पर मुखर हो गई है। पीडीपी सांसद और पूर्व उप मुख्यमंत्री मुजफ्फर हुसैन बेग कहते हैं कि हम कश्मीर प्रस्ताव को लागू कराना चाहते हैं। पीडीपी ने 2002 में कांग्रेस के साथ जब सरकार बनाई तक न्यूनतम साझा कार्यक्रम में भी कश्मीर प्रस्ताव शामिल रहा।

इसमें कश्मीर को स्वायत्तता देने की बात कही गई है। इसके अलावा पाकिस्तान से बातचीत पर भी पीडीपी जोर दे रही है। अफस्पा और सेना की वापसी पीडीपी के मुद्दे में शुमार है। नेकां और पीडीपी दोनों दल एक दूसरे को पीछे छोड़ने की कोशिश में कश्मीरियों की इच्छा से समस्या के समाधान की बात करने लगे हैं जिसका संकेत जनमत संग्रह की ओर होता है।

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