जम्मू-कश्मीरः पंचायत उपचुनाव में नेशनल कांफ्रेंस सशर्त भाग लेने को तैयार
पंचायत उपचुनाव में नेशनल कांफ्रेंस सशर्त भाग लेने को तैयार है। उपचुनाव में भागीदारी की इच्छा जताते हुए उसने मुख्य चुनाव अधिकारी शैलेंद्र कुमार को पत्र लिखकर चुनाव प्रचार अभियान में आने वाली बाधाओं को दूर करने की अपील की है।
नेकां(नेशनल कांफ्रेंस) के केंद्रीय सचिव रतन लाल गुप्ता ने पत्र में कहा है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व नजरबंद है। ऐसे में उम्मीदवार के चयन के अलावा चुनाव प्रचार अभियान में पार्टी को भारी समस्या आएगी। नेकां लोकतांत्रिक मूल्यों पर विश्वास रखती है और पांच मार्च से शुरू हो रहे आठ चरण वाले पंचायत उपचुनाव में हिस्सा लेना चाहती है।
लेकिन पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला, उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला और महासचिव अली मोहम्मद सागर की नजरबंदी से वास्तव में पार्टी के लिए चुनाव में भागीदारी संभव नहीं है। नियमों के तहत उम्मीदवारों के नामांकन पर पार्टी के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। ऐसे में मुख्यधारा के नेताओं को अपनी विचारधारा का खुलकर लोगों के बीच प्रचार-प्रसार करने की अनुमति होनी चाहिए।
2018 में हुए पंचायत चुनाव का नेकां ने किया था बहिष्कार
उन्होंने मुख्य चुनाव अधिकारी से अपील की है कि वह पार्टी को सलाह दें कि बाधाओं को दूर कर चुनाव में किस तरह से हिस्सा ले सकती है। अगर चुनाव में भाजपा को छोड़ अन्य किसी भी दल को भागदारी से रोकने का लक्ष्य है तो इस पर और कुछ नहीं कहा जा सकता। फिर भी अगर लक्ष्य जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने का है तो बाधाओं को दूर किया जाना चाहिए।
2018 में हुए पंचायत चुनाव का नेकां के साथ ही पीडीपी ने बहिष्कार किया था। जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित क्षेत्र बनने के बाद पहली बार यहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत पंचायत उपचुनाव हो रहे हैं। ये चुनाव 2018 के चुनाव के उलट पार्टी के चुनाव चिह्न पर लड़े जा रहे हैं।