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नेशनल कांफ्रेंस ने फारूक अब्दुल्ला के चीन से सहयोग से अनुच्छेद 370 वापस लाने वाले बयान पर दी सफाई
Mon, 12 Oct 2020 09:02 PM IST
Mohit Mudgal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Mohit Mudgal
Updated Mon, 12 Oct 2020 09:02 PM IST
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फारूक अब्दुल्ला
- फोटो : बासित जरगर
नेशनल कांफ्रेंस ने फारूक अब्दुल्ला के अनुच्छेद 370 वाले बयान पर सफाई दी है। नेशनल कांफ्रेस ने बयान जारी कर कहा कि फारूक अब्दुल्ला ने कभी नहीं कहा कि अनुच्छेद 370 को चीन की मदद से बहाल किया जाएगा। नेशनल कांफ्रेंस ने आरोप लगया कि भाजपा ने फारूक अब्दुल्ला के बयान को तोड़-मरोड के पेश किया है।
बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम और नेशनल कांफ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला ने रविवार को कहा था कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी तनाव अनुच्छेद 370 हटाने का नतीजा है।
चीन शुरू से इसका विरोध करता रहा है और सीमा पर उसका आक्रामक रुख मोदी सरकार के इस गलत कदम के कारण है।
अब्दुल्ला ने एक कार्यक्रम में कहा था कि मैंने कभी चीनी राष्ट्रपति को निमंत्रण नहीं दिया, ऐसा करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे। उन्होंने सिर्फ न्योता ही नहीं भेजा, बल्कि यहां झूले पर भी बैठाया। उन्हें चेन्नई ले गए और उनके साथ खाना खाया। लेकिन जो 5 अगस्त 2019 को जो सरकार ने किया, वह किसी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। हम नहीं करते, चीन भी नहीं कर रहा।
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अब्दुल्ला ने कहा था कि घाटी के लोगों की हालत के बारे में हमें संसद में बोलने तक नहीं दिया जाता। यहां के लोगों को क्या सुख है? देश जहां 4जी इस्तेमाल कर रहा, 5जी आने वाला है फिर भी वहां के लोग 2जी के इस्तेमाल को मजबूर हैं। यह कैसा बराबरी का दर्जा है? ऐसे कैसे युवा आगे बढ़ेंगे?
इसके अलावा अब्दुल्ला ने लोकसभा में कहा था कि भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत करनी चाहिए। जिस प्रकार चीन से बातचीत की कोशिश की जा रहा है उसी तरह उलझे हुए मुद्दों पर पाकिस्तान के साथ चर्चा होनी चाहिए।
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बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम और नेशनल कांफ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला ने रविवार को कहा था कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी तनाव अनुच्छेद 370 हटाने का नतीजा है।
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चीन शुरू से इसका विरोध करता रहा है और सीमा पर उसका आक्रामक रुख मोदी सरकार के इस गलत कदम के कारण है।
अब्दुल्ला ने एक कार्यक्रम में कहा था कि मैंने कभी चीनी राष्ट्रपति को निमंत्रण नहीं दिया, ऐसा करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे। उन्होंने सिर्फ न्योता ही नहीं भेजा, बल्कि यहां झूले पर भी बैठाया। उन्हें चेन्नई ले गए और उनके साथ खाना खाया। लेकिन जो 5 अगस्त 2019 को जो सरकार ने किया, वह किसी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। हम नहीं करते, चीन भी नहीं कर रहा।
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अब्दुल्ला ने कहा था कि घाटी के लोगों की हालत के बारे में हमें संसद में बोलने तक नहीं दिया जाता। यहां के लोगों को क्या सुख है? देश जहां 4जी इस्तेमाल कर रहा, 5जी आने वाला है फिर भी वहां के लोग 2जी के इस्तेमाल को मजबूर हैं। यह कैसा बराबरी का दर्जा है? ऐसे कैसे युवा आगे बढ़ेंगे?
इसके अलावा अब्दुल्ला ने लोकसभा में कहा था कि भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत करनी चाहिए। जिस प्रकार चीन से बातचीत की कोशिश की जा रहा है उसी तरह उलझे हुए मुद्दों पर पाकिस्तान के साथ चर्चा होनी चाहिए।