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पीएम मोदी के पैकेज को उमर ने बताया मजाक

Sun, 08 Nov 2015 10:17 AM IST
Updated Sun, 08 Nov 2015 10:17 AM IST
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narendra modi weighing jammu and kashmir in rupees: omar

पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को श्रीनगर में प्रेस कांफ्रेंस में मोदी द्वारा दिए गए पैकेज को मजाक बताया। उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोगों को पैकेज की नहीं सियासी हल की जरूरत है। उमर ने ट्विटर पर ट्वीट कर कहा है कि कश्मीर मुद्दों को रुपयों-पैसों में तौलकर गलत किया।

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उमर अब्दुल्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने से पहले उनके दौरे के बारे में बहुत कुछ कहा गया और बड़े एलान करने की उम्मीद जताई गई। यहां तक कहा गया कि इस दौरे का असर आने वाली कश्मीर की नस्लों के लिए भी काफी अहम होगा।
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हमें भी बेसब्री से इंतजार था लेकिन ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई। भाषण में तीन अल्फाज इस्तेमाल हुए इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत की वाजपेयी साहब के हवाले से बात हुई लेकिन जो हम सुनना चाहते थे वो नहीं हुआ।
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कहां गई वो इंसानियत जब उधमपुर में हमारे एक शख्स को जिंदा जलाया गया। कहां गई इंसानियत दादरी, हिमाचल और हरियाणा के कांडों के बाद। उन्होंने कहा कि वहां आरएसएस को हथियारों समेत जुलूस निकालने की इजाजत दी जाती है लेकिन यहां जुलूस निकालने की बात करने वालों को हिरासत में ले लिया जाता है।

सीएम का एजेंडा ऑफ एलायंस कहां गया

narendra modi weighing jammu and kashmir in rupees: omar

जब विधायक इंजीनियर रशीद पर अपनी बात रखने पर भाजपा विधायकों द्वारा हमला किया गया था। वाजपेयी ने पाकिस्तान की ओर दोस्ती का हाथ भी बढ़ाया था और बातचीत के माहौल को कायम करने की कोशिश भी की थी।

मोदी द्वारा अपने संबोधन में कहा गया कि मुझे किसी के सबक की जरूरत नहीं। उन्होंने अपने ही मुख्यमंत्री का सबक नजरअंदाज किया। उनसे पहले तो मुफ्ती साहब ने पाकिस्तान से बातचीत और दोस्ती का हाथ बढ़ाने के अलावा सियासी मसले का हल निकालने की बात की थी। मुफ्ती साहब क्या कर रहे हैं? आखिर फिर उनका एजेंडा ऑफ एलायंस कहां गया जब आपसी सहमति ही नहीं।

उमर ने कहा कि लोगों ने पैसों के लिए कुर्बानियां नहीं दीं और न ही यहां गरीबी का मसला है। यह एक सियासी मसला है। पैकेज तो बक्शी गुलाम मोहम्मद के समय से आते रहे हैं। हम इस ऐतिहासिक तरीख का इंतजार कर रहे थे कि शायद दोबारा से बातचीत के लिए रास्ता खुलेगा। म्हूरियत को पंचायती इलेक्शन के दायरे में लाना गलत है।

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