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Jammu News: नाबार्ड ने 37 हजार करोड़ की ऋण संभावना का किया आकलन
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मीरां साहिब। स्काॅस्ट चठा के बाबा जीतो सभागार में राष्ट्रीय कृषि व ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने एक दिवसीय सेमीनार का आयोजन किया। शिविर में नाबार्ड जम्मू-कश्मीर द्वारा वर्ष 2024-25 के लिए प्राथमिकता क्षेत्र के अंतर्गत 37446.04 करोड़ रुपये की ऋण संभाव्यता का आकलन किया गया। इस दौरान यूटी फोकस पेपर को जारी किया गया। इस दौरान डॉ. शाहिद इकबाल चौधरी, प्रशासनिक सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, बलदेव प्रकाश, एमडी जम्मू एंड कश्मीर बैंक, डॉ. बी.एन. त्रिपाठी कुलपति स्कास्ट जम्मू, संदीप मित्तल महाप्रबंधक आरबीआई, अजय कुमार झा महाप्रबंधक भारतीय स्टेट बैंक और लाइन विभागों के अधिकारियों और अन्य प्रतिष्ठित गणमान्य लोग शामिल रहे।
नाबार्ड, जम्मू और कश्मीर के मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) भल्लामुड़ी श्रीधर ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और जम्मू-कश्मीर के विकास में नाबार्ड की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने सम्बोधन में सावधानीपूर्वक योजना, ऋण वितरण, निगरानी और विभिन्न हितधारकों के साथ सहयोग के माध्यम से प्राथमिकता क्षेत्र के ऋण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नाबार्ड का ध्यान समुदाय-आधारित व्यावसायिक संस्थाओं जैसे किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), सहकारिता, स्वयं सहायता समूह संघों आदि पर है। इसी प्रकार क्षेत्र विस्तार और उत्पादकता में सुधार के माध्यम से अखरोट, केसर और सेब जैसी बागवानी फसलों की क्षमता का आकलन नाबार्ड के लिए विशेष महत्व और केन्द्रित क्षेत्र होगा। उन्होंने कहा कि कृषित्तर उत्पादक संगठन (ओएफपीओ), विपणन सहायता और भौगोलिक संकेत (जीआई) पंजीकरण के माध्यम से हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को प्राथमिकता के आधार पर कम्प्यूटरीकृत किया जा रहा है और उन्हें बहुक्रियाशील समितियों में बदलने के प्रयास जारी हैं।
मुख्य महाप्रबंधक नाबार्ड, जम्मू-कश्मीर द्वारा केंद्र शासित प्रदेशों के 20 जिलों में केसीसी वितरण के मुद्दों, चुनौतियों और स्थिति पर एक प्रस्तुति दी गई। प्रस्तुति नाबार्ड अधिकारियों द्वारा 20 जिलों के 175 ब्लॉकों में 5000 किसानों से एकत्र किए गए प्राथमिक आंकड़ों पर आधारित थी।
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अनामिका, महाप्रबंधक, नाबार्ड, जम्मू और कश्मीर द्वारा प्राथमिकता क्षेत्र में बुनियादी स्तर पर ऋण प्रवाह की प्रवृत्ति और 2024-25 में नाबार्ड द्वारा अनुमानित क्षमता पर प्रस्तुति दी गई। उन्होंने 2024-25 में नाबार्ड द्वारा ग्रामीण विकास की प्रमुख प्राथमिकताओं पर भी प्रकाश डाला।
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नाबार्ड, जम्मू और कश्मीर के मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) भल्लामुड़ी श्रीधर ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और जम्मू-कश्मीर के विकास में नाबार्ड की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने सम्बोधन में सावधानीपूर्वक योजना, ऋण वितरण, निगरानी और विभिन्न हितधारकों के साथ सहयोग के माध्यम से प्राथमिकता क्षेत्र के ऋण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नाबार्ड का ध्यान समुदाय-आधारित व्यावसायिक संस्थाओं जैसे किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), सहकारिता, स्वयं सहायता समूह संघों आदि पर है। इसी प्रकार क्षेत्र विस्तार और उत्पादकता में सुधार के माध्यम से अखरोट, केसर और सेब जैसी बागवानी फसलों की क्षमता का आकलन नाबार्ड के लिए विशेष महत्व और केन्द्रित क्षेत्र होगा। उन्होंने कहा कि कृषित्तर उत्पादक संगठन (ओएफपीओ), विपणन सहायता और भौगोलिक संकेत (जीआई) पंजीकरण के माध्यम से हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को प्राथमिकता के आधार पर कम्प्यूटरीकृत किया जा रहा है और उन्हें बहुक्रियाशील समितियों में बदलने के प्रयास जारी हैं।
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मुख्य महाप्रबंधक नाबार्ड, जम्मू-कश्मीर द्वारा केंद्र शासित प्रदेशों के 20 जिलों में केसीसी वितरण के मुद्दों, चुनौतियों और स्थिति पर एक प्रस्तुति दी गई। प्रस्तुति नाबार्ड अधिकारियों द्वारा 20 जिलों के 175 ब्लॉकों में 5000 किसानों से एकत्र किए गए प्राथमिक आंकड़ों पर आधारित थी।
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अनामिका, महाप्रबंधक, नाबार्ड, जम्मू और कश्मीर द्वारा प्राथमिकता क्षेत्र में बुनियादी स्तर पर ऋण प्रवाह की प्रवृत्ति और 2024-25 में नाबार्ड द्वारा अनुमानित क्षमता पर प्रस्तुति दी गई। उन्होंने 2024-25 में नाबार्ड द्वारा ग्रामीण विकास की प्रमुख प्राथमिकताओं पर भी प्रकाश डाला।