{"_id":"5ed91f8b8ebc3e904359fb3d","slug":"muslim-community-helped-in-the-ritual-of-pandit-woman-in-bandipora","type":"story","status":"publish","title_hn":"बांदीपोरा का कलूसा गांव बना मिसालः पंडित महिला के संस्कार में मुस्लिम समुदाय ने की मदद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बांदीपोरा का कलूसा गांव बना मिसालः पंडित महिला के संस्कार में मुस्लिम समुदाय ने की मदद
Thu, 04 Jun 2020 09:51 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
Published by: Vikas Kumar
Updated Thu, 04 Jun 2020 09:51 PM IST
विज्ञापन
बांदीपोरा में मुस्लिम समुदाय ने किया पंडित महिला का अंतिम संस्कार
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले के कलूसा इलाके में पंडित महिला के अंतिम संस्कार में मुस्लिम समुदाय ने भाईचारे की मिसाल कायम की। 75 वर्षीय रानी भट का बुधवार देर रात देहांत हो गया था। पता चलते ही आसपास के मुसलमान मदद के लिए उनके घर पहुंचे। जरूरी सामग्री खरीदने के साथ अंतिम संस्कार तक साथ रहे और हर तरह की मदद की।
विज्ञापन
मृतका के परिवार ने भी सहयोग के लिए मुस्लिम भाइयों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हम हमेशा एक होकर रहे हैं और यही हमारी पहचान है। मुस्लिम भाई हमेशा हमारे साथ खड़े रहे हैं और यह भाईचारा सदियों से चला आ रहा है।
विज्ञापन
बांदीपोरा में अब भी कई पंडित परिवार रह रहे हैं जिन्होंने 90 के दशक में आतंकवाद शुरू होने के बावजूद भी घाटी से पलायन नहीं किया। तबसे ही ये इलाका पंडित-मुस्लिम भाईचारे के लिए पूरी घाटी में मशहूर है। दोनों समुदाय के लोग एक दूसरे की खुशियों में शामिल होने के साथ साथ एक दूसरे का दुख दर्द भी बांटते हैं।
विज्ञापन
कई दशक से साथ रहे हैं कश्मीरी पंडित और मुस्लिम समुदाय
स्थानीय निवासी बशीर अहमद ने बताया कि पंडित महिला की मौत के बारे में पता चलने पर आसपास के लोग रात में ही उनके घर पहुंच गए थे। सुबह भी जिसने यह खबर सुनी वह आ पहुंचा। उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार में शामिल होना उनका कर्तव्य था। इतना ही नहीं पड़ोसियों ने अंतिम रस्में निभाने संबंधी सामग्री जुटाने में भी मदद की। बशीर के अनुसार यह हमारी संस्कृति है। हम पिछले कई दशक से एक साथ रह रहे हैं और हर घड़ी में एक दूसरे की मदद करते आ रहे हैं।