मोदी-मुफ्ती लगाएंगे अमन के एजेंडे पर मुहर
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भाजपा और पीडीपी की नई सरकार के गठबंधन एजेंडे में अमन और विकास को तरजीह दी गई है। दोनों दलों के वार्ताकारों ने अठारह राउंड की बैठकों में मंथन कर विवादास्पद मुद्दों का समाधान खोज निकाला। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की मुलाकात में गठबंधन का ऐलान हो चुका है।
अब 26 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद की मुलाकात में गठबंधन एजेंडे को अंतिम स्वीकृति दे दी जाएगी। इस तरह देश के एकमात्र मुस्लिम बहुल राज्य में पहली बार भाजपा के सरकार में शामिल होने का रास्ता भी साफ हो गया है।
गठबंधन एजेंडे को उच्च स्तरीय मंजूरी की औपचारिकता के बाद एक मार्च तक मुफ्ती मोहम्मद मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर सकते हैं। उनके साथ भाजपाई उप मुख्यमंत्री के अलावा बारह सदस्यीय मंत्रिमंडल का भी शपथ ग्रहण तय है।
18 राउंड की मैराथन वार्ता बनी सीएमपी का आधार
पीडीपी के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी की व्यस्तता के कारण 25 फरवरी को मुफ्ती के साथ उनकी मुलाकात संभव नहीं हो पा रही है। यह मुलाकात अब 26 फरवरी को प्रस्तावित है। भाजपा और पीडीपी ने अनुच्छेद 370 और अफस्पा पर बीच का रास्ता निकालने में एक महीने का वक्त लगाया।
अनुच्छेद 370 हटाने के प्रति संघ परिवार की प्रतिबद्धता ने भाजपा की राह में मुश्किल बना दी थी। उधर पीडीपी ने इस मुद्दे पर भाजपा से लिखित में आश्वासन की शर्त रखकर मुद्दे को और उलझा दिया था। अब भाजपा ने इस जम्मू कश्मीर के संविधान और कश्मीरियों की भावना के सम्मान के बहाने बीच का रास्ता निकाल लिया गया है।
अफस्पा पर पीडीपी भी झुकी है। वह कमेटी बनाकर इस कानून की आंशिक रूप से क्रमवार वापसी पर सहमत है। भाजपा और पीडीपी के गठबंधन एजेंडे को गुरुवार को सार्वजनिक किया जा सकता है।
गठबंधन की सफलता के रेखांकित करने के लिए संसद के बजट सत्र में एनएचपीसी के एक-दो पावर प्रोजेक्टों को रियासत को वापस करने का ऐलान भी संभव है। 13वें वित्त आयोग की रिपोर्ट में भी इसका जिक्र है जिसे संसद के बजट सत्र में सदन के पटल पर रखा जाना है।