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मुफ्ती बताएंगे रियासत के खाली खजाने का सच

Thu, 05 Mar 2015 10:13 AM IST
Updated Thu, 05 Mar 2015 10:13 AM IST
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mufti govt issued white paper on state economy

मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद ने जम्मू-कश्मीर के खाली खजाने का सच अवाम को बताने का निर्णय लिया है। वित्तीय स्थिति और ताजा संकट के कारण रियासत के विकास पर ग्रहण से संबंधित श्वेत पत्र जारी करने की तैयारी शुरू हो गई है।

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वित्त मंत्री डॉ. हसीब द्राबू जाने-माने आर्थिक विशेषज्ञ और बैंकर रहे हैं। उन्हें वित्त मंत्रालय मिलना तय था, लिहाजा वित्तीय संकट पर उन्होंने पहले से होमवर्क पूरा कर लिया है।
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वित्त विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी और योजना विकास के प्रिंसिपल सेक्रेटरी के साथ विचार-विमर्श कर लेखानुदान की जगह पूर्ण बजट पेश करने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्यपाल शासन के दौरान लेखानुदान के लिए तैयारी पूरी हो गई थी। अब नए सिरे से मंथन चल रहा है।
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बजट सत्र 18 मार्च से शुरू होगा

mufti govt issued white paper on state economy

बजट सत्र 18 मार्च से शुरू होगा और बजट पारित कराने के लिए भाजपा-पीडीपी गठबंधन सरकार के पास सिर्फ 13 दिन होंगे। बजट को किसी भी हालत में 31 मार्च से पहले पारित कराने की तैयारी है। इसके लिए युद्धस्तर पर तैयारियां शुरू हो गईं हैं।

रियासत की स्वीकृत वार्षिक योजना और विशेष योजना सहायता मद की 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार के पास लंबित है। इसे जारी नहीं किया गया है। इस वित्तीय वर्ष में महज 27 दिन शेष हैं और इतने कम समय में पूर्ण राशि जारी कराना रियासत सरकार के लिए चुनौती है।

राशि जारी होने पर भी विकास योजनाओं को कम समय में पूरा करना और राशि का उपयोग दूसरी चुनौती होगी। भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की प्रतिबद्धता से सरकार में आए मुफ्ती को कम समय में राशि खर्च करने के दौरान होने वाले घोटाले को रोकने का पुख्ता इंतजाम करना होगा। यह सबसे बड़ी चुनौती है।

7300 करोड़ की वार्षिक योजना मंजूरी

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केंद्र सरकार ने रियासत के लिए 7300 करोड़ की वार्षिक योजना मंजूर की थी। इसके अलावा केंद्र प्रायोजित राशि के 4 हजार करोड़ और प्रधानमंत्री पुनर्वास कार्यक्रम मद में 600 करोड़ की राशि मिलनी है। राज्य सरकार का खजाना खाली है।

रियासत के पास कर्मचारियों के वेतन और पेंशन मद के लिए भी राशि कम पड़ रही है। बाढ़ के कारण टैक्स वसूली भी प्रभावित हुई। इस कारण आंतरिक संसाधन सूख गए हैं। राज्यपाल एनएन वोहरा ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात कर वित्तीय संकट की हालत बताई थी।

उसके बाद केंद्रीय वित्त मंत्रालय और रियासत सरकार के अधिकारियों के बीच तीन उच्चस्तरीय बैठकें हो चुकी हैं। संकट फिर भी कायम है। विकास योजनाएं ठप पड़ीं हैं।

उमर सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन का ठीकरा फूटेगा

mufti govt issued white paper on state economy

नई सरकार का मानना है कि उमर अब्दुल्ला सरकार वित्तीय प्रबंधन में विफल रही, इसलिए संकट पैदा हुआ। चुनाव से ऐन पहले नई प्रशासनिक इकाइयां गठित हुईं।

बजट में पांच करोड़ का प्रावधान था और दूसरे मद की राशि इसके लिए उपयोग की गई। बाढ़ राहत के लिए केंद्र ने 1000 करोड़ दिए, लेकिन उमर सरकार डीपीआर नहीं भेज सकी।

नतीजतन राशि का उपयोग नहीं हो सका। योजना बनाने में विफलता के कारण केंद्र ने समय पर राशि जारी नहीं की। चुनाव से पूर्व रेवड़ियां बांटी गईं। रिटायरमेंट आयु दो साल बढ़ा दी गई। इन कारणों से वित्तीय संकट पैदा हुआ।

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