फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Mother Language Day: Dogri language became means of employment are ignoring it

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस: डोगरी भाषा जिनके लिए रोजगार का साधन बनी, वही कर रहे इसकी अनदेखी

Tue, 21 Feb 2023 01:14 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Tue, 21 Feb 2023 01:14 PM IST
सार

डोगरी में हर तरह का साहित्य लिखा जा रहा है। डोगरी नाटक लिखे जा रहे हैं, लेकिन मंचन नहीं हो रहा है, जिन सरकारी संस्थाओं के पास डोगरी भाषा के विकास की जिम्मेवारी है वह अपना दायित्व पूरा करने में विफल हो रहे हैं।

विज्ञापन
Mother Language Day: Dogri language became means of employment are ignoring it
मातृभाषा दिवस - फोटो : संवाद

विस्तार

12 वर्ष के लंबे संघर्ष के बाद 2003 में डोगरी भाषा संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल तो हुई, लेकिन 19 साल के सफर के बाद आज भी अपने अस्तित्व का जंग लड़ रही है। डोगरी भाषा लोगों के लिए रोजगार का साधन तो बनी, लेकिन रोजगार लेने वाले लोग ही इसकी अनदेखी कर रहे हैं। आज डोगरी के संरक्षण के लिए सरकार की पहल से ज्यादा इस भाषा को बोलने वाले लोगों के प्रयासों की जरूरत है। यह बात साहित्यकार पद्मश्री मोहन सिंह ने कही।

विज्ञापन

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य पर अमर उजाला से विशेष बातचीत करते हुए मोहन सिंह ने कहा कि संविधान की अनुसूची में शामिल होने के बाद डोगरी भाषा का विकास तो हुआ। डोगरी में हर तरह का साहित्य लिखा जा रहा है। डोगरी नाटक लिखे जा रहे हैं, लेकिन मंचन नहीं हो रहा है, जिन सरकारी संस्थाओं के पास डोगरी भाषा के विकास की जिम्मेवारी है वह अपना दायित्व पूरा करने में विफल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत सरकार ने प्राइमरी तक स्थानीय भाषा में पढ़ाने का फैसला लिया है। सरकार के इस फैसले से डोगरी भाषा को बढ़ावा मिलेगा। छोटे बच्चों के बीच डोगरी भाषा पहुंचेगी।

विज्ञापन

मोहन सिंह ने कहा कि अगर सरकार मातृभाषा को बढ़ावा देने का काम कर रही है तो लोगों को इसमें आगे आना चाहिए। मातृभाषा के संरक्षण की जिम्मेवारी उसे बोलने वाले लोगों को उठानी होगी। सरकार ने डोगरी को राज्यकीय भाषा का दर्जा तो दिया है, लेकिन इसका लाभ नहीं मिला है। इसमें भाषा बोलने वाले लोग सबसे बड़े जिम्मेदार हैं। लोग विभागों में जो पत्र देते हैं, वह डोगरी भाषा में नहीं लिखे होते हैं। मातृभाषा के प्रति हमें खुद में सम्मान का भाव पैदा करना होगा तभी हम मातृभाषा का संरक्षण कर सकेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed