जम्मू-कश्मीर में हर साल दो हजार से अधिक दुर्घटनाएं
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जम्मू कश्मीर में प्रतिदिन सड़क दुर्घटनाओं में औसतन चार लोगों की मौत होती है। प्रतिवर्ष दो हजार से अधिक दुर्घटनाओं में नौ हजार से अधिक लोग घायल होते रहे हैं। दुर्घटनाओं से होने वाली मौतें आतंकी हमलों में मारे गए लोगों की संख्या से कई गुणा अधिक हैं। जम्मू से डोडा, किश्तवाड़, भद्रवाह, राजोरी-पुंछ और रामबन को जोड़ने वाली सड़कें दुर्घटना के दृष्टिकोण से अतिसंवेदनशील रही हैं।
सड़क दुर्घटनाओं में लगातार मौतों के बाद लोगों ने जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर कई नालों और घाटियों का नया नामकरण कर दिया है जो दुर्घटना के दृष्टिकोण से संवेदनशील स्थानों की भयावहता को दर्शाता है। खूनी नाला और शैतानी नाला जैसे नाम दुर्घटनाओं में हो रही बढ़ोतरी की ओर इशारा करते हैं।
सड़क सुरक्षा के सरकारी इंतजामों में कमी के बाद आम लोगों ने कई मोड़ों पर देवी-देवताओं की मूर्तियां लगा दी हैं। सड़क यात्रा भगवान भरोसे ही पूरी होती है।
सड़क हादसों में घायल हुए 36 हजार
मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात के दौरान सड़क सुरक्षा और जम्मू-श्रीनगर हाईवे के सुरक्षित वैकल्पिक रूट पर बात की है। रियासत सरकार के दस्तावेज बताते हैं कि चार साल में सड़क दुर्घटनाओं में 4471 लोगों की मौतें हुई हैं।
इन दुर्घटनाओं में 36 हजार 473 लोग घायल हुए। इस दौरान 25 हजार से अधिक सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं। पिछले महीने मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद ने विधान परिषद को बताया कि अकेले कश्मीर घाटी में तीन साल में 892 लोग सड़क दुर्घटनाओं के कारण काल के गाल में समा गए।
कश्मीर घाटी में तीन साल में 8 हजार 733 लोग दुर्घटनाओं में घायल हुए। सड़क दुर्घटनाओं के कई मामलों में दोषी लोगों पर कार्रवाई भी होती रही है। तीन साल में कश्मीर में दुर्घटनाओं के लिए दोषी 2880 लोगों पर कार्रवाई हुई। घाटी में तीन साल में सिर्फ कश्मीर घाटी के 12 जिलों में 6 हजार 67 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं हैं।
चार साल में 25460 सड़क हादसे
इससे पहले ट्रांसपोर्ट मंत्री ने सदन को जानकारी दी थी कि चार साल में पूरी रियासत में 25 हजार 460 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं। सिर्फ जम्मू संभाग में इस दौरान 780 मौतें हुईं। चिनाब घाटी सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाओं की साक्षी बनती रही है। इसके तहत किश्तवाड़, रामबन और डोडा में चार साल में 823 मौतें हुईं।
अकेले चिनाब घाटी में चार साल में ढाई हजार सड़क दुर्घटनाएं हुईं हैं। विभाग मानता है कि सड़कों के रखरखाव में कमी के अलावा ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल और तीखे मोड़ों पर तेज ड्राइविंग दुर्घटनाओं के कारणों में प्रमुख हैं। कई बार वाहनों में तकनीकी खराबी भी दुर्घटनाओं का कारण बनती है।