चिशोती में चमत्कार: मौत के मुंह से लौटा सुभाष, 30 घंटे मलबे में दबे रहने के बाद लंगर वाला निकला जिंदा
किश्तवाड़ के चिशोती में बादल फटने के बाद मलबे में लगभग 30 घंटे दबे लंगर संचालक सुभाष चंद्र को बचाया गया, जिसे स्थानीय लोग मचैल माता की कृपा मान रहे हैं। इस त्रासदी में अब तक 60 लोग मारे गए और कई लापता हैं, जबकि बचाव कार्य जारी है।
विस्तार
किश्तवाड़ के चिशोती गांव में माया मचैल माता की कृपा से एक बड़ा चमत्कार देखने को मिला। भारी बादल फटने और बाढ़ के बीच करीब 30 घंटे मलबे के नीचे दबे रहने के बाद लंगर चलाने वाले सुभाष चंद्र को जीवित बचा लिया गया। सुभाष वर्षों से मचैल माता के तीर्थयात्रियों के लिए लंगर चलाते आ रहे हैं, जहां हजारों यात्री थकान मिटाने और भोजन ग्रहण करने आते थे।
नेता सुनील शर्मा ने कहा, यहां की पुरानी कहावत है ‘जिसे मचैल माता की रक्षा मिलती है, उसे कोई हानि नहीं पहुंचा सकता। सुभाष के बच जाने से यह बात फिर सच साबित हुई। उन्होंने कहा कि सुभाष अब फिर से लंगर शुरू कर मंदिर के भक्तों की सेवा करेंगे, जो उनके जीवन का सबसे बड़ा उपहार है।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि 14 अगस्त को बादल फटने और फ्लैश फ्लड के समय लगभग 200 से 300 भक्त लंगर में थे, जबकि क्षेत्र में 1,000 से 1,500 तीर्थयात्री मौजूद थे। बाढ़ ने लंगर सहित आसपास के इलाके को पूरी तरह तबाह कर दिया। चार शव सुभाष के आसपास मिले, लेकिन वह जिंदा बच गए।
आर्मी, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय लोगों की टीम ने मलबा हटाते हुए सुभाष को बचाया। एक आर्मी अधिकारी ने कहा, यह ऑपरेशन में अब तक की पहली बार है जब कोई जीवित मिला है, जो एक तरह का चमत्कार है। शनिवार को और चार लोगों को भी मलबे से बाहर निकाला गया, जिससे बचाव अभियान में आशा जगी है।
सुभाष को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें किश्तवाड़ जिला अस्पताल स्थानांतरित किया गया। नायब तहसीलदार सुषील कुमार ने बताया कि उनकी चोटें गंभीर नहीं हैं, इसलिए उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है।
स्थानीय लोग सुभाष के बचने को ईश्वरीय कृपा मान रहे हैं और कहते हैं कि उनकी लंगर सेवा का फल उन्हें मिला है।
14 अगस्त को मूसलाधार बारिश और अचानक आई बाढ़ ने चिशोती गांव में तबाही मचा दी। करीब 12:25 बजे आयी इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 60 लोगों की मौत हो चुकी है और 100 से ज्यादा घायल हुए हैं। अभी भी 82 लोग लापता हैं, जिनमें ज्यादातर तीर्थयात्री हैं।
बाढ़ ने लंगर, एक अस्थायी बाजार, सुरक्षा चौकी, 16 मकान, तीन मंदिर, चार पानी की चक्कियां, 30 मीटर लंबा पुल और कई वाहन तबाह कर दिए। मचैल माता की सालाना यात्रा, जो 25 जुलाई से शुरू हुई थी, 5 सितंबर तक चलनी थी, पर अब तीसरे दिन भी स्थगित है।
चिशोती से 8.5 किलोमीटर का कठिन रास्ता 9,500 फीट ऊंचाई पर स्थित मछैल माता मंदिर तक जाता है, जो किश्तवाड़ शहर से लगभग 90 किलोमीटर दूर है।