सैन्य अफसरों का दौरा मुद्दों को हल करने में मददगार: चीन
सेना के उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा के नेतृत्व में सैन्य अफसरों की टीम की बीजिंग यात्रा को चीन के सुरक्षा विशेषज्ञ भी क्षेत्र में अमन शांति के लिए सकारात्मक पहल बता रहे हैं। उनका मानना है कि इस तरह के दौरे से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर दोनों देशों की सेना के बीच आपसी समझ बनेगी।
भारतीय सुरक्षा मुद्दों पर चीनी विशेषज्ञ कियान फेंग के अनुसार भारतीय सेना के उत्तरी कमान प्रमुख डीएस हुड्डा का छह दिवसीय चीन दौरा संकेत देता है कि द्विपक्षीय सीमा नियंत्रण तंत्र मानक और संस्थागत बन गया है।
जो सीमांत क्षेत्र को सामान्य बनाने के क्रम में अनुकूल है। हालांकि दोनों देशों के बीच कुछ संवेदनशील मुद्दों को अभी तक हल नहीं किया गया है, बावजूद इसके संबंध मजबूत करने का प्रयास किया जा सकता है।
दौरा आपात स्थिति के दौरान गलत फैसलों को कम करेगा
कियान ने कहा कि भारत-चीन सीमा के कमांडर के रूप में हुड्डा की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के उच्च स्तरीय सैन्य अफसरों के साथ बैठक आपसी समझ को प्रोत्साहन देगी और आपात स्थिति के दौरान गलत फैसलों को कम करेगी।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा, ‘हमारा मानना है कि इस तरह के विचार-विमर्श का आदान-प्रदान दोनों देशों की सेना के बीच आपसी समझ और विश्वास बढ़ाने में मददगार होगा। इससे वह सीमा संबंधी मामलों को बेहतर तरीके से हल कर सकेंगे जिसके साथ सीमांत इलाकों में अमन शांति स्थापित हो पाएगी।’
इसी साल मई माह में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चीन दौरे के दौरान दोनों पक्षों ने सीमा रक्षा सहयोग बढ़ाने और दोनों देशों के सैन्य हेडक्वार्टर और करीबी सैन्य क्षेत्रों में वार्षिक दौरे करने पर सहमति जताई थी।