शोपियां में मौत की जांच को तर्कसंगत निष्कर्ष तक पहुंचाया जाएगाः सीएम महबूबा
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि शोपियां में फायरिंग में दो युवकों की मौत की जांच को तर्कसंगत निष्कर्ष तक पहुंचाया जाएगा। वे विधानसभा में काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब दे रही थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी घटनाएं राज्य मे राजनीतिज्ञ प्रक्रिया को कमजोर और धीमी कर देती हैं।
घटना के तुंरत बाद ही दोषियों के खिलाफ एफ आईआर दर्ज करवाई गई थी। डीसी शोपियां को मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए थे। 15 दिनों के भीतर इसकी रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं। घटना का पता चलते ही उन्होंने नई दिल्ली में रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण से बात की।
उन्होंने इस संबंध मे उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया है। कहा कि यूनिफाइड कमांड की बैठकों में भी उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों से अधिकाधिक संयम बरतने को कहा है।
पुलिस की कोशिश थी सेना उस इलाके से न गुजरे
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस की कोशिश थी कि सेना उस इलाके से न गुजरे, लेकिन उनका जाना जरूरी था। ऐसे में यह घटना हो गई। उन्होंने कहा कि यूनिफाइड कमांड की बैठकों में भी वह लगातार सुरक्षाबलों से अधिकाधिक संयम बरतने को कहती रही है।
पहले मुठभेड़ के दौरान गांव खाली हो जाते थे, लेकिन आज मुठभेड़ शुरू होते ही सैकड़ों की भीड़ सुरक्षाबलों पर पत्थर बरसाने लगते हैं।
बातचीत से ही हल होंगे शोपियां जैसे मसले
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को शोपियां में नागरिकों की मौत पर सदन की चिंता को साझा करते हुए कहा कि पूरा राज्य इनकी कड़ी निंदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि शोपियां की तरह की परिस्थितियों को केवल बातचीत के माध्यम से ही निपटाया जा सकता है।
पिछले 30 साल से राज्य इस प्रकार के हालात को झेल रहा है। सभी का कहना है कि कश्मीर मसला है, तो इसे हल क्यों नहीं करते। महबूबा ने कहा कि दरअसल, भाजपा के प्रधानमंत्रियों के अलावा केवल आईके गुजराल ने ही कश्मीर समस्या को हल करने की कोशिश की थी।
उन्होंने जोर देकर कहा कि कश्मीर मसले का हल केवल बातचीत से ही हो सकता है। इसके अलावा और कोई चारा नहीं है। महबूबा ने कहा कि यदि किसी पार्टी ने संजीदगी से कश्मीर मसले के हल की पहल की है तो वह भाजपा ही है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसकी शुरुआत की।
लाहौर तक बस चली। मुशर्रफ को आगरा बुलाया, लेकिन बातचीत की प्रक्रिया फिर रुक गई। दुर्भाग्य कि संसद पर हमला हो गया। पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने अलगाववादियों तथा आतंकियों से बात की, लेकिन यूपीए सरकार ने अपने 10 साल के कार्यकाल में वाजपेयी सरकार की ओर से शुरू राजनीतिक प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया।