कुछ भी पत्थर की लकीर नहीं होता, अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए लड़ाई लड़ने के लिए तैयारः महबूबा मुफ्ती
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पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यधारा के राजनीतिक दलों को दबाने का आरोप लगाया है। कहा कि ये दल बलि का बकरा बन गए हैं और हर कोई उन्हीं पर ठीकरा फोड़ रहा है। इन सबके बावजूद हम अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए एक लंबी और कठिन राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं।
महबूबा ने कहा कि सच यह है कि हम अपना पूरा राजनीतिक जीवन दिल्ली की तरफ से लग रहे पाकिस्तान समर्थक और कश्मीर के भारत विरोधी होने के आरोपों से लड़ते हुए बिता देंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पीडीपी और गुपकार गठबंधन बनाने वाले मुख्यधारा के छह अन्य दलों ने केवल लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीकों से पूर्ववर्ती राज्य के विशेष दर्जे को बहाल कराने के लिए लड़ने का संकल्प लिया था। लेकिन भारत सरकार हमें अब भी दबा रही है और असंतोष के स्वरों को अपराध की तरह दिखा रही है।
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महबूबा से जब पूछा गया कि क्या उन्हें वाकई उम्मीद है कि भारत में कोई भी सरकार संसद की ओर से 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म करने के फैसले को पलट सकती है तो उन्होंने कहा कि कुछ भी पत्थर की लकीर नहीं होता। अगर संसद का फैसला ही अंतिम होता तो लाखों लोग सीएए या कृषि विधेयकों जैसे कानूनों के खिलाफ सड़कों पर नहीं उतरे होते। हमसे जो भी असांविधानिक तरीके से छीना गया है उसे लौटाना होगा, लेकिन यह लंबी और कठिन राजनीतिक लड़ाई होगी।
अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले ने अलगाव को और बढ़ाया
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में डीडीसी के चुनावों में 280 सीटों में से 112 पर गुपकार गठबंधन (पीएजीडी) की जीत ने दिखा दिया है कि जनता ने अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने के फैसले को स्पष्ट रूप से नकार दिया है। महबूबा ने कहा कि भाजपा ने चुनाव में अनुच्छेद 370 के मुद्दे को उठाकर इसे एक जनमत संग्रह बना दिया। इसलिए लोगों ने सामूहिक रूप से हमारे गठबंधन के लिए वोट दिया और स्पष्ट कर दिया कि वे 5 अगस्त 2019 के गैरकानूनी फैसले को खारिज करते हैं।
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भाजपा के गठबंधन तोड़ने के फैसले से नहीं थी निराशा
उन्होंने कहा कि आगे का रास्ता सभी पक्षों के साथ सुलह और संवाद का है। इसके अलावा देश की संप्रभुता से समझौता किए बिना समाधान के लिए कई विकल्पों पर विचार-विमर्श करने और जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने का भी है। पूर्ववर्ती राज्य में सरकार बनाने के लिए पीडीपी के भाजपा के साथ गठबंधन के बारे में पूछे जाने पर कहा कि मेरे पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद ने सब कुछ दांव पर लगाकर एक व्यापक उद्देश्य से गठबंधन बनाने के लिए प्रयास किया था। वह 2018 में भाजपा के गठबंधन तोड़ने के फैसले से निराश नहीं थीं।