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समर्पण करने वाले आतंकियों का कबूलनामाः आईएसआई और आतंकी संगठन 'ऐसे कर रहे हैं भर्तियां'

Tue, 05 Jan 2021 02:15 AM IST
एजेंसी Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 05 Jan 2021 02:15 AM IST
सार

समर्पण करने वाले दो आतंकियों ने किया बड़ा खुलासा
आतंकी संगठनों में भर्ती के लिए युवाओं को भड़काया जा रहा
40 ऐसे मामले जिनमें भर्ती के लिए हुआ सोशल मीडिया का इस्तेमाल
सुरक्षाबलों की सतर्कता से बौखलाहट में आतंकी संगठन

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ISI is preparing sleeper cells in kashmir Valley recruiting terrorists from social media-mobile app
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों द्वारा आतंकियों पर शिकंजा कसे जाने के बाद पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के आका अब दहशतगर्दों की नई भर्तियां सोशल मीडिया व मोबाइल एप के जरिये कर रहे हैं। एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि सुरक्षाबलों की सतर्कता से स्थानीय स्तर पर आतंकियों की भर्ती में भी काफी कमी आई है। आतंकियों के आका अपने गुर्गों से सीधा संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में हताश पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी और वहां सक्रिय आतंकी संगठनों के आकाओं ने आतंकियों की नई भर्ती के लिए यह नया रास्ता निकाला है। 

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अधिकारी ने कहा कि आतंकी संगठनों में भर्ती के लिए युवाओं को भड़काया जा रहा है, जिसके लिए आतंकी संगठन और आईएसआई कश्मीर में कथित अत्याचारों के वीडियो का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि भर्ती पर लगी लगाम से आतंकी संगठन पूरी तरह से बौखला गए हैं। पहले आईएसआई और आतंकी संगठनों नई भर्ती के लिए फाइलें तैयार करके रैंक देने के लिए अपने समर्थकों के साथ प्रत्यक्ष रूप से संपर्क स्थापित करते थे, लेकिन सुरक्षाबलों द्वारा नकेल कसने के बाद उन्होंने अपने तौर तरीके बदल लिए हैं।
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अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2020 में सुरक्षा एजेंसियों ने दो दर्जन से अधिक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया। इसमें आतंकियों के 40 से अधिक मददगारों की गिरफ्तारी हुई है। दिसंबर के अंत में सेना की 34 राष्ट्रीय राइफल्स के समक्ष हथियार डालने वाले आतंकवादी तवर वाघेई और अमीर अहमद मीर ने पूछताछ में खुलासा किया था कि बड़े पैमाने पर साइबर भर्ती की जा रही है। उन्होंने कहा था कि वे दोनों फेसबुक के माध्यम से पाकिस्तान स्थित एक हैंडलर के संपर्क में आए थे। उसने बरगालकर खालिद और मोहम्मद अब्बास शेख के साथ परिचय करवाया था। दोनों को यूट्यूब पर उपलब्ध विभिन्न लिंक का उपयोग करके ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया था। उसके बाद दोनों ने दक्षिण कश्मीर के शोपियां में केवल एक बार अपने स्थानीय संपर्क से मुलाकात की थी।

आईएसआई घाटी में तैयार कर रही स्लीपर सेल

अधिकारी के अनुसार आईएसआई घाटी में सुरक्षाबलों से बचने के लिए स्लीपर सेल तैयार करती थी। सुरक्षा एजेंसियों ने स्थानीय लोगों से मिले खुफिया इनपुट के बाद कई मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। उन्होंने कहा कि दोनों को बाद में प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) में भर्ती किया गया, जहां दोनों पाकिस्तानी मूल के बुरहान हमजा से आदेश के साथ ही धार्मिक शिक्षा भी हासिल करते थे।

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अधिकारी ने कहा कि दक्षिण कश्मीर में ही 40 ऐसे मामले थे जिनमें भर्ती के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया गया था। नई भर्ती के लिए सीमा पार से आदेश के इंतजार थे। अधिकारी ने कहा कि निश्चित तौर पर आतंकी संगठन हथियारों की कमी से जूझ रहे हैं। यही कारण है कि अब पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन मैनपॉवर के स्थान पर हथियार भेजने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने जम्मू शहर के बाहरी क्षेत्र में हुई मुठभेड़ का भी जिक्र किया कि जिसमें चार आतंकियों का समूह 11 असॉल्ट राइफल और भारी मात्रा में गोला बारूद लेकर जा रहा था।

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