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पुलवामा हमला: भारत के लिए नासूर बन गया है कंधार हाइजैक में छूटा आतंकी, जैश सरगना अजहर
Thu, 14 Feb 2019 09:30 PM IST
दुष्यंत शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 14 Feb 2019 09:30 PM IST
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मसूद अजहर
- फोटो : फाइल
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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर आत्मघाती हमले का मास्टरमाइंड भी मसूद अजहर ही है। जिस तरह से पाकिस्तान के पीओके में बैठ कर उरी हमले की साजिश रची गई उसी तरह से पुलवामा हमले की साजिश भी पाकिस्तान के पीओके में ही रची गई है जिसमें जैश ने स्थानीय आतंकियों के साथ मिलकर इसका तानाबाना बुना।
सूत्रों का कहना है कि जिस तरह से उरी हमले से पहले आतंकियों ने उरी कैंपी की पूरी रेकी की थी। ठीक उसी तरह से आतंकियों ने पुलवामा पर हाइवे की रेकी की। आतंकियों को पूरी सूचना थी कि सीआरपीएफ का काफिला गुजरेगा। कितने बजे गुजरेगा और इसमें कितने वाहन होंगे। इसकी तमाम जानकारियां थीं। यहीं नहीं, कहीं न कहीं सुरक्षा एजेंसियों के पास भी इसके इनपुट थे।
सूत्रों का कहना है कि उरी हमले के बाद जब भारतीय सेना की तरफ से सर्जिकल स्ट्राइक किया गया तो उस समय सबसे ज्यादा नुकसान जैश ए मोहम्मद का किया गया था। उसके टाप के कमांडरों का मारा गया था। 18 सितंबर 2016 को उरी हमला हुआ था। इसके कुछ दिन के बाद ही सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक किया।
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जैश सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से ही उरी की तरह ही एक और हमला करने की कोशिश कर रहा था। पिछले दो साल से जैश ए मोहम्मद के काफी टाप कमांडर मारे गए हैं। इसलिए जैश ने हमला करने के लिए एक आत्मघाती तैयार किया। ताकि हमले को आसानी से अंजाम दे सके क्योंकि अन्य हमलों की तर्ज पर होने वाले हमले में कामयाबी कम मिल रही थी।
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सूत्रों का कहना है कि जिस तरह से उरी हमले से पहले आतंकियों ने उरी कैंपी की पूरी रेकी की थी। ठीक उसी तरह से आतंकियों ने पुलवामा पर हाइवे की रेकी की। आतंकियों को पूरी सूचना थी कि सीआरपीएफ का काफिला गुजरेगा। कितने बजे गुजरेगा और इसमें कितने वाहन होंगे। इसकी तमाम जानकारियां थीं। यहीं नहीं, कहीं न कहीं सुरक्षा एजेंसियों के पास भी इसके इनपुट थे।
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सूत्रों का कहना है कि उरी हमले के बाद जब भारतीय सेना की तरफ से सर्जिकल स्ट्राइक किया गया तो उस समय सबसे ज्यादा नुकसान जैश ए मोहम्मद का किया गया था। उसके टाप के कमांडरों का मारा गया था। 18 सितंबर 2016 को उरी हमला हुआ था। इसके कुछ दिन के बाद ही सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक किया।
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जैश सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से ही उरी की तरह ही एक और हमला करने की कोशिश कर रहा था। पिछले दो साल से जैश ए मोहम्मद के काफी टाप कमांडर मारे गए हैं। इसलिए जैश ने हमला करने के लिए एक आत्मघाती तैयार किया। ताकि हमले को आसानी से अंजाम दे सके क्योंकि अन्य हमलों की तर्ज पर होने वाले हमले में कामयाबी कम मिल रही थी।
मौलाना मसूद अजहर आंतकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख है। ये वही मौलाना मसूद अजहर है जिसे 17 साल पहले 1999 में कंधार विमान अपहरण मामले में भारत ने रिहा किया था। मालूम हो कि 24 दिसंबर 1999 को 5 हथियारबंद आतंकवादियों ने 178 यात्रियों के साथ इंडियन एयरलाइंस के हवाई जहाज आईसी-814 का अपहरण कर लिया था। हरकत-उल-मुजाहिद्दीन के आतंकियों ने भारत सरकार के सामने 178 यात्रियों की जान के बदले में अपने तीन आतंकियों की रिहाई का सौदा किया था।
उन तीन आतंकवादियों में से एक मसूद अजहर भी था। 1999 में वाजपेयी सरकार ने यात्रियों की जान बचाने के लिए मसूद अजहर समेत तीन आतंकियों को छोड़ने का फैसला किया था। उस वक्त मौलाना मसूद अजहर आतंकी संगठन हरकत-उल-मुजाहिदीन का सदस्य था। रिहाई के बाद पाकिस्तान के कराची में 31 जनवरी 2000 को मौलाना मसूद अजहर ने जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन की शुरूआत के साथ जेहाद की दुनिया में फिर कदम रखा।
जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन का मुखिया मौलाना मसूद हरकत-उल-अंसार का महासचिव भी रह चुका है। आतंकी अजहर का जन्म पाकिस्तान के बाहावलपुर में 1968 को हुआ था। ग्यारह भाई-बहनों में अजहर 10वें नंबर के थे। अजहर के पिता सरकारी स्कूल में हेडमास्टर थे। उसका परिवार डेयरी का करोबार भी करता था। मौलाना मसूद अजहर की शिक्षा करांची में जामिया उलूम अल इस्लामिया में हुई। बाद में अजहर हरकत-उल अंसार संगठन से जुड़ गया। पहली बार अजहर को 1994 में आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में श्रीनगर में गिरफ्तार किया गया।
दिसंबर 2001 में भारतीय संसद पर हमले के बाद अजहर को पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था लेकिन लाहौर हाईकोर्ट के आदेश पर 2002 में उसे रिहा कर दिया गया। 2002 में अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या और उसके अपहरण के बाद अमेरिका ने अजहर मसूद को सौंपने की मांग की थी। मसूद के सहयोगी शेख अहमद सईद उमर ने पर्ल की हत्या कर दी थी।2003 में परवेज मुशर्रफ पर हुए आत्मघाती हमले के मामले में भी उस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
दिसंबर 2008 में भारत और अमेरिका के दबाव के कारण पाक सरकार ने मसूद को उसके आवास पर नजरबंद कर दिया था। इससे पहले भी दो बार अजहर को हिरासत में लिया गया था हालांकि हर बार वह बचने में कामयाब रहा। जैश-ए-मोहम्मद एक पाकिस्तानी जेहादी संगठन है जिसके आतंकी जम्मू-कश्मीर समेत भारत के कई राज्यों में हुए आतंकी हमलों में शामिल रहे हैं। मार्च इसकी स्थापना साल 2000 में मसूद अजहर ने की थी। जनवरी 2002 में जब इसे पाकिस्तान की सरकार ने बैन कर दिया तब जैश ए मोहम्मद ने अपना नाम बदलकर खुद्दाम उल इस्लाम कर लिया था।
उन तीन आतंकवादियों में से एक मसूद अजहर भी था। 1999 में वाजपेयी सरकार ने यात्रियों की जान बचाने के लिए मसूद अजहर समेत तीन आतंकियों को छोड़ने का फैसला किया था। उस वक्त मौलाना मसूद अजहर आतंकी संगठन हरकत-उल-मुजाहिदीन का सदस्य था। रिहाई के बाद पाकिस्तान के कराची में 31 जनवरी 2000 को मौलाना मसूद अजहर ने जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन की शुरूआत के साथ जेहाद की दुनिया में फिर कदम रखा।
जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन का मुखिया मौलाना मसूद हरकत-उल-अंसार का महासचिव भी रह चुका है। आतंकी अजहर का जन्म पाकिस्तान के बाहावलपुर में 1968 को हुआ था। ग्यारह भाई-बहनों में अजहर 10वें नंबर के थे। अजहर के पिता सरकारी स्कूल में हेडमास्टर थे। उसका परिवार डेयरी का करोबार भी करता था। मौलाना मसूद अजहर की शिक्षा करांची में जामिया उलूम अल इस्लामिया में हुई। बाद में अजहर हरकत-उल अंसार संगठन से जुड़ गया। पहली बार अजहर को 1994 में आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में श्रीनगर में गिरफ्तार किया गया।
दिसंबर 2001 में भारतीय संसद पर हमले के बाद अजहर को पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था लेकिन लाहौर हाईकोर्ट के आदेश पर 2002 में उसे रिहा कर दिया गया। 2002 में अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या और उसके अपहरण के बाद अमेरिका ने अजहर मसूद को सौंपने की मांग की थी। मसूद के सहयोगी शेख अहमद सईद उमर ने पर्ल की हत्या कर दी थी।2003 में परवेज मुशर्रफ पर हुए आत्मघाती हमले के मामले में भी उस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
दिसंबर 2008 में भारत और अमेरिका के दबाव के कारण पाक सरकार ने मसूद को उसके आवास पर नजरबंद कर दिया था। इससे पहले भी दो बार अजहर को हिरासत में लिया गया था हालांकि हर बार वह बचने में कामयाब रहा। जैश-ए-मोहम्मद एक पाकिस्तानी जेहादी संगठन है जिसके आतंकी जम्मू-कश्मीर समेत भारत के कई राज्यों में हुए आतंकी हमलों में शामिल रहे हैं। मार्च इसकी स्थापना साल 2000 में मसूद अजहर ने की थी। जनवरी 2002 में जब इसे पाकिस्तान की सरकार ने बैन कर दिया तब जैश ए मोहम्मद ने अपना नाम बदलकर खुद्दाम उल इस्लाम कर लिया था।
इन देशों में प्रतिबंधित है मसूद का संगठन
मसूद अजहर के आतंकी संगठन पर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और भारत समेत कई देशों में प्रतिबंधित है। फिर भी मसूद अजहर पाकिस्तान में खुलेआम रैलियों में भारत के खिलाफ जहर उगलता है। मसूद अजहर को भारतीय विमान के अपहरण करने के लिए कभी कोई सजा नहीं मिली।
जैश-ए-मोहम्मद (आतंकी संगठन) की स्थापना फरवरी 2000 में पाक के कराची में संगठन के मुखिया मौलाना मसूद अजहर ने की। इस आतंक संगठन का मुख्य उद्देश्य कश्मीर में हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी करना व भारत में आतंकी वारदात को अंजाम देना है।
संगठन का मुख्य तरीका आत्मघाती हमला करना है। जैश-ए-मोहम्मद कट्टरपंथी विचारों वाले ऑडियो कैसेट कश्मीर भेज कर युवाओं को गुमराह करता है। इस संगठन में हरकत-उल-मुजाहिद्दीन और हरकत-उल-अंसार के कई चरमपंथी शामिल हैं।
अमेरिका की ब्लैक लिस्ट में जैश-ए-मोहम्मद
अमेरिका द्वारा तैयार की गई विदेशी आतंकी गुटों की सूची में पाक स्थित जैश-ए-मुहम्मद और लश्कर-ए-ताइबा को रखा गया था। इस सूची में 44 आतंकी संगठन शामिल हैं। लश्कर और जैश दोनों ही लंबे समय भारत में आतंकी गतिविधियां चला रहे हैं।
जैश-ए-मोहम्मद (आतंकी संगठन) की स्थापना फरवरी 2000 में पाक के कराची में संगठन के मुखिया मौलाना मसूद अजहर ने की। इस आतंक संगठन का मुख्य उद्देश्य कश्मीर में हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी करना व भारत में आतंकी वारदात को अंजाम देना है।
संगठन का मुख्य तरीका आत्मघाती हमला करना है। जैश-ए-मोहम्मद कट्टरपंथी विचारों वाले ऑडियो कैसेट कश्मीर भेज कर युवाओं को गुमराह करता है। इस संगठन में हरकत-उल-मुजाहिद्दीन और हरकत-उल-अंसार के कई चरमपंथी शामिल हैं।
अमेरिका की ब्लैक लिस्ट में जैश-ए-मोहम्मद
अमेरिका द्वारा तैयार की गई विदेशी आतंकी गुटों की सूची में पाक स्थित जैश-ए-मुहम्मद और लश्कर-ए-ताइबा को रखा गया था। इस सूची में 44 आतंकी संगठन शामिल हैं। लश्कर और जैश दोनों ही लंबे समय भारत में आतंकी गतिविधियां चला रहे हैं।