मसर्रत आलम पर 16वीं बार पीएसए लगा
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कश्मीर घाटी में राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल अलगाववादी नेता मसर्रत आलम पर सरकार ने 16वीं बार पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) लगाया है। 31 अगस्त को पिछली बार उसे कोट भलवाल जेल से रिहा करने के चंद सेकेंड बाद फिर जेआईसी थाने की पुलिस ने उठा लिया था।
मसर्रत के खिलाफ जेआईसी पुलिस स्टेशन में 2012 से केस दर्ज था। बाद में उसे मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में पेश कर एक सप्ताह की रिमांड पर लिया गया था। लेकिन, प्रशासन ने रिमांड अवधि समाप्त होने के पहले ही उस पर पीएसए लगाकर उसे वापस कोट भलवाल जेल भेज दिया गया।
वर्ष 2007 में श्रीनगर की ओल्ड सिटी में अलगाववादी नेता गिलानी के लिए बड़ी रैली आयोजित करने के बाद मसर्रत आलम चर्चा में आया था। राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के आरोप में उसके बाद से उसने अपने जीवन का ज्यादातर समय जेल में ही बिताया है।
कश्मीर घाटी से कोट भलवाल जेल में कैद
पाकिस्तानी झंडे लहराने और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण 17 अप्रैल को उसे गिरफ्तार किया गया था और उस पर पीएसए लगाया गया था।
इसके बाद उसे कश्मीर घाटी से कोट भलवाल जेल भेज दिया गया था। हाईकोर्ट ने उसे पीएसए के तहत न्यायिक हिरासत में रखने को अवैध करार दिया था और सरकार को उसे रिहा करने के आदेश दिए थे।
इसके बाद एक सितंबर को उसे रिहा किया गया था। नौ मार्च को रियासत में नई गठबंधन सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री मुफ्ती ने मसर्रत की रिहाई के आदेश दिए थे। इसके बाद काफी विवाद हुआ था