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जम्मू-कश्मीर पुलिसकर्मी शहीद मंजूर को अनुकरणीय साहस के लिए मिला मरणोपरांत शौर्य चक्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Thu, 11 Oct 2018 08:59 PM IST
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शहीद कांस्टेबल मंजूर अहमद नाइक
जम्मू-कश्मीर पुलिस के कांस्टेबल मंजूर अहमद नाइक को आतंकियों के खिलाफ अनुकरणीय साहस के लिए मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है। मंजूर बारामूला जिले के उड़ी के रहने वाले थे। 5 मार्च 2017 को पुलवामा जिले में त्राल के हफ्फू नगीनपोरा गांव में आतंकियों से मोर्चा लेते हुए अपनी जान गंवा दी थी।
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि मंजूर जम्मू-कश्मीर पुलिस, राष्ट्रीय राइफल्स और सीआरपीएफ द्वारा संयुक्त रूप से चलाए जा रहे घेराबंदी और तलाशी अभियान में शामिल थे।
ऐसे हुआ था घटनाक्रम
घटना वाले दिन 33 वर्षीय मंजूर एक घर में छिपे आतंकियों को बाहर निकालने की कोशिश कर रहे थे। भारी गोलीबारी के बीच नाइक ने अंधेरे में घर के चारों ओर विस्फोटक रखा। वहां से पीछे लौटते वक्त उन पर आतंकियों ने भारी गोलीबारी की लेकिन वह बाल-बाल बच गए। विस्फोट में घर का आधा हिस्सा उड़ गया। दो घंटे के इंतजार के बाद नाइक ने घर के बचे हिस्से को उड़ाने के लिए विस्फोटक लगाने गए। दूसरी बार घर की ओर जाते वक्त आतंकियों की गोली का वह निशाना बन गए। घायल होने के बावजूद मंजूर घर तक पहुंच गए और सांस बंद होने से पहले घर के बचे हुए हिस्से को भी विस्फोट से उड़ा दिया।
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गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि मंजूर जम्मू-कश्मीर पुलिस, राष्ट्रीय राइफल्स और सीआरपीएफ द्वारा संयुक्त रूप से चलाए जा रहे घेराबंदी और तलाशी अभियान में शामिल थे।
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ऐसे हुआ था घटनाक्रम
घटना वाले दिन 33 वर्षीय मंजूर एक घर में छिपे आतंकियों को बाहर निकालने की कोशिश कर रहे थे। भारी गोलीबारी के बीच नाइक ने अंधेरे में घर के चारों ओर विस्फोटक रखा। वहां से पीछे लौटते वक्त उन पर आतंकियों ने भारी गोलीबारी की लेकिन वह बाल-बाल बच गए। विस्फोट में घर का आधा हिस्सा उड़ गया। दो घंटे के इंतजार के बाद नाइक ने घर के बचे हिस्से को उड़ाने के लिए विस्फोटक लगाने गए। दूसरी बार घर की ओर जाते वक्त आतंकियों की गोली का वह निशाना बन गए। घायल होने के बावजूद मंजूर घर तक पहुंच गए और सांस बंद होने से पहले घर के बचे हुए हिस्से को भी विस्फोट से उड़ा दिया।
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तीसरा सबसे बड़ा सैन्य सम्मान
सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच इस मुठभेड़ में दो हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी मारे गए थे और बड़ी मात्रा में हथियार व विस्फोटक बरामद हुआ था। मंजूर के इसी अनुकरणीय साहस के लिए मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। अशोक चक्र और कीर्ति चक्र के बाद शौर्य चक्र तीसरा सबसे बड़ा सैन्य सम्मान है।