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Jammu News: मानसून सिर पर, प्रभावित संस्थानों में बाढ़ सुरक्षा के इंतजाम अधूरे
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जम्मू। पिछले वर्ष 26 अगस्त को भीषण बाढ़ से प्रभावित हुए जम्मू विश्वविद्यालय ओल्ड कैंपस, आईआईआईएम और इंस्टीट्यूट ऑफ म्यूजिक एंड फाइन आर्ट में सुरक्षा व पुनर्स्थापना कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाए हैं। करीब दस माह बाद भी राहत का इंतजार है। आगामी मानसून को देखते हुए छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
आयुक्त सचिव शिक्षा शांत मनु ने प्रभावित परिसरों में सुरक्षा दीवारों, बाढ़ रोधी उपाय और अन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पांच करोड़ रुपये का प्रस्ताव सरकार को भेजा था जिसकी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. उमेश राय का कहना है कि आपदा प्रबंधन विभाग से मंजूरी नहीं मिली है। बाढ़ के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था। इसके बावजूद स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं किए जा सके हैं। मानसून आने को कुछ दिन शेष हैं। ऐसे में हालात और बदतर हो सकते हैं।
जम्मू विश्वविद्यालय ओल्ड कैंपस - छात्रावास, प्रोफेसर आवास व अन्य भवनों में करीब चार फीट तक पानी भर गया था। बाउंड्री वॉल क्षतिग्रस्त हुई, वाहन और घरेलू सामान को नुकसान पहुंचा। छात्रों को रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला गया था। मौजूदा स्थिति यह है कि स्थायी सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर एक ईंट तक लग सकी है।
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इंस्टीट्यूट ऑफ म्यूजिक एंड फाइन आर्ट - भवनों और आधारभूत ढांचे को नुकसान पहुंचा था। कई हिस्सों में शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। सुरक्षा और संरक्षण के कार्यों की आवश्यकता महसूस हुई लेकिन कोई बदलाव नहीं आया। मौजूदा हालात यह है कि इंस्टीट्यूट परिसर झाड़ियों में तब्दील हो रहा है।
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आईआईआईएम - छात्रों को शिफ्ट करने के बाद छात्रावास सूना पड़ा है। संस्थान की ओर से इमारत को उपयोग नहीं किया जा रहा है। आवासीय सुविधाओं के संचालन में कठिनाई आ रही है। सुरक्षा उपायों और ढांचागत सुधार के लिए प्रस्ताव पाइपलाइन में फंसा है।
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संस्थान परिसर से निकलकर नाला कैनाल रोड की तरफ गया जिससे छात्रावास में जलभराव हो गया। संबंधित विभाग को प्रस्ताव भेजा गया। कोई भी काम न होने के कारण छात्रावास को खाली कर दिया गया है।
- डॉ. जबीर अहमद, इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन डायरेक्टर
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आयुक्त सचिव शिक्षा शांत मनु ने प्रभावित परिसरों में सुरक्षा दीवारों, बाढ़ रोधी उपाय और अन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पांच करोड़ रुपये का प्रस्ताव सरकार को भेजा था जिसकी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. उमेश राय का कहना है कि आपदा प्रबंधन विभाग से मंजूरी नहीं मिली है। बाढ़ के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था। इसके बावजूद स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं किए जा सके हैं। मानसून आने को कुछ दिन शेष हैं। ऐसे में हालात और बदतर हो सकते हैं।
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जम्मू विश्वविद्यालय ओल्ड कैंपस - छात्रावास, प्रोफेसर आवास व अन्य भवनों में करीब चार फीट तक पानी भर गया था। बाउंड्री वॉल क्षतिग्रस्त हुई, वाहन और घरेलू सामान को नुकसान पहुंचा। छात्रों को रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला गया था। मौजूदा स्थिति यह है कि स्थायी सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर एक ईंट तक लग सकी है।
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इंस्टीट्यूट ऑफ म्यूजिक एंड फाइन आर्ट - भवनों और आधारभूत ढांचे को नुकसान पहुंचा था। कई हिस्सों में शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। सुरक्षा और संरक्षण के कार्यों की आवश्यकता महसूस हुई लेकिन कोई बदलाव नहीं आया। मौजूदा हालात यह है कि इंस्टीट्यूट परिसर झाड़ियों में तब्दील हो रहा है।
आईआईआईएम - छात्रों को शिफ्ट करने के बाद छात्रावास सूना पड़ा है। संस्थान की ओर से इमारत को उपयोग नहीं किया जा रहा है। आवासीय सुविधाओं के संचालन में कठिनाई आ रही है। सुरक्षा उपायों और ढांचागत सुधार के लिए प्रस्ताव पाइपलाइन में फंसा है।
संस्थान परिसर से निकलकर नाला कैनाल रोड की तरफ गया जिससे छात्रावास में जलभराव हो गया। संबंधित विभाग को प्रस्ताव भेजा गया। कोई भी काम न होने के कारण छात्रावास को खाली कर दिया गया है।
- डॉ. जबीर अहमद, इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन डायरेक्टर