लोकसभा चुनाव: अनंतनाग-राजोरी सीट पर पहाड़ी आरक्षण के शोर में दबे महिलाओं सहित अन्य मुद्दे
पांच संसदीय सीटों में अनंतनाग-राजोरी सीट पर सबसे ज्यादा महिला वोटर होने के बावजूद यहां महिलाओं के मुद्दों से ज्यादा पहाड़ियों को मिला अनुसूचित जनजाति और गुज्जर समुदाय को विधानसभा में मिला राजनीतिक आरक्षण का मुद्दा हावी रहेगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जम्मू-कश्मीर की पांच लोकसभा सीटों में सबसे निर्णायक अनंतनाग-राजोरी संसदीय सीट रहने वाली है। इस सीट के चुनाव परिणामों पर जहां सबकी नजर रहेगी वहीं इसे जीतने के लिए सब पार्टियां जोर-आजमाइश कर रही हैं। सबसे ज्यादा 9.02 लाख महिला वोटर भी इसी सीट पर हैं। यह एक मात्र सीट है जिसमें जम्मू और कश्मीर संभाग के मतदाता एक साथ वोट डालेंगे।
पांच संसदीय सीटों में सबसे ज्यादा महिला वोटर होने के बावजूद यहां महिलाओं के मुद्दों से ज्यादा पहाड़ियों को मिला अनुसूचित जनजाति और गुज्जर समुदाय को विधानसभा में मिला राजनीतिक आरक्षण का मुद्दा हावी रहेगा।
अनंतनाग-राजोरी सीट में कुल 183357 वोटर हैं, जिसमें 931289 लाख पुरुष और 902255 महिला वोटर हैं। अनंतनाग सीट हमेशा से मुस्लिम बहुल सीट रही है, लेकिन परिसीमन के बाद इसमें हिंदू वोटर जुड़ा है। ऐसे में इस सीट पर अब जीत हासिल करना राजनीतिक पार्टी विशेषकर (कश्मीर केंद्रित) पार्टियों के लिए आसान नहीं रहेगा।
जम्मू विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान की पूर्व प्रोफेसर रेखा चौधरी ने बताया कि अनंतनाग-राजोरी सीट पर पहली बार पुंछ और राजोरी जिले की सात विधानसभा सीटों को जोड़ा गया है। पुंछ-राजोरी में महिलाओं के कई मुद्दे हैं, जिनमें शिक्षा सबसे अहम है। अब पहाड़ियों को एसटी का दर्जा और एसटी के लिए विधानसभा में सीटें आरक्षित होने जैसे बड़े मुद्दों में महिलाओं के मुद्दे दब गए हैं।
प्रदेश की 18 विधानसभा सीटें इस संसदीय सीट में आती हैं, जिसमें से 11 विस सीटें कश्मीर संभाग की जबकि सात जम्मू संभाग की हैं। जम्मू संभाग में पुंछ और राजोरी जिले की सुंदरबनी और कोटरंका विस सीट को छोड़ दें तो अन्य सभी विधानसभा सीटें इसमें आती हैं। कश्मीर संभाग की अनंतनाग, कुलगाम और शोपियां जिले की जेनपूरा सीट इसमें आती है।
अनंतनाग सीट पर पीडीपी-नेकां का रहा है दबदबा
पूर्व की अनंतनाग लोकसभा सीट पर दो दशक तक नेकां और पीडीपी का दबदबा रहा है। 1998 में मुफ्ती मोहम्मद सैयद ने कांग्रेस की टिकट से इन सीट पर जीत हासिल की थी। 2004 में पीडीपी की महबूबा मुफ्ती जबकि 2009 में नेकां के महबूब बेग ने जीत हासिल की। 2014 में फिर पीडीपी की महबूबा मुफ्ती और 2019 में नेकां के हसनैन मसूदी ने जीत हासिल की। इस बार इस सीट पर जीत के लिए राजनीति पार्टियों को नए समीकरण बिठाने होंगे।