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उमर बोले लोकसभा चुनाव के बाद और अमरनाथ यात्रा से पहले विधानसभा चुनाव के लिए है पर्याप्त समय
Sun, 31 Mar 2019 09:26 PM IST
दुष्यंत शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 31 Mar 2019 09:26 PM IST
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उमर अब्दुल्ला
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
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पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रियासत में जल्द विधानसभा चुनाव कराने की वकालत की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य के लोग किसी एक पार्टी के शासन के पक्ष में मतदान करेंगे न कि गठबंधन वाली सरकार बनाने के पक्ष में। गठबंधन सरकार का सिलसिला 2002 से चल रहा है।
नेकां उपाध्यक्ष ने कहा कि राज्य में विधानसभा का चुनाव लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद तीन से पांच सप्ताह के भीतर कराए जा सकते हैं क्योंकि तब पर्याप्त संख्या में सुरक्षाबल उपलब्ध होंगे। लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण का मतदान 19 मई को है और मतों की गिनती 23 मई को होगी। अब्दुल्ला ने कहा कि हमारे पास निश्चित रूप से लोकसभा चुनाव के बाद और अमरनाथ यात्रा से पहले का समय है।
राज्य में तीन से पांच सप्ताह के भीतर विधानसभा चुनाव कराना संभव है। यदि चाहें तो हम इसकी तैयारी संसदीय चुनाव के अंतिम चरणों से शुरू कर सकते हैं। इसके बाद चुनाव कराने के लिए जून का पूरा महीना है । कहा कि विश्वास करने लायक कोई कारण नहीं है जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि आयोग जल्द चुनाव कराने में रुचि नहीं ले रहा।
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उन्होंने कहा कि अमरनाथ यात्रा की वजह से चुनाव में देरी नहीं होनी चाहिए। यह यात्रा जुलाई के पहले सप्ताह से शुरू होती है। अगर रमजान संसदीय चुनाव के लिए बाधक नहीं है तो विधानसभा चुनाव के लिए अमरनाथ यात्रा क्यों बाधक होगी। अमरनाथ यात्रा दो जिलों अनंतनाग और गांदरबल में होती है। तकनीकी तौर पर कहें तो विधानसभा क्षेत्र पहलगाम और कंगन में यह होती है।ऐसा कार्यक्रम तय किया जा सकता है कि इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव या तो यात्रा से पहले या फिर यात्रा के तत्काल बाद समाप्त हो जाएं।
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नेकां उपाध्यक्ष ने कहा कि राज्य में विधानसभा का चुनाव लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद तीन से पांच सप्ताह के भीतर कराए जा सकते हैं क्योंकि तब पर्याप्त संख्या में सुरक्षाबल उपलब्ध होंगे। लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण का मतदान 19 मई को है और मतों की गिनती 23 मई को होगी। अब्दुल्ला ने कहा कि हमारे पास निश्चित रूप से लोकसभा चुनाव के बाद और अमरनाथ यात्रा से पहले का समय है।
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राज्य में तीन से पांच सप्ताह के भीतर विधानसभा चुनाव कराना संभव है। यदि चाहें तो हम इसकी तैयारी संसदीय चुनाव के अंतिम चरणों से शुरू कर सकते हैं। इसके बाद चुनाव कराने के लिए जून का पूरा महीना है । कहा कि विश्वास करने लायक कोई कारण नहीं है जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि आयोग जल्द चुनाव कराने में रुचि नहीं ले रहा।
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उन्होंने कहा कि अमरनाथ यात्रा की वजह से चुनाव में देरी नहीं होनी चाहिए। यह यात्रा जुलाई के पहले सप्ताह से शुरू होती है। अगर रमजान संसदीय चुनाव के लिए बाधक नहीं है तो विधानसभा चुनाव के लिए अमरनाथ यात्रा क्यों बाधक होगी। अमरनाथ यात्रा दो जिलों अनंतनाग और गांदरबल में होती है। तकनीकी तौर पर कहें तो विधानसभा क्षेत्र पहलगाम और कंगन में यह होती है।ऐसा कार्यक्रम तय किया जा सकता है कि इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव या तो यात्रा से पहले या फिर यात्रा के तत्काल बाद समाप्त हो जाएं।
उमर ने कहा कि जैसे ही आम चुनाव समाप्त होंगे तो देश के अन्य जगहों पर सुरक्षा बल की जरूरत नहीं होगी। इसके बाद यहां अतिरिक्त सुरक्षाबलों को तैनात कर सकते हैं। राज्य में चुनाव में देरी का कोई कारण नहीं दिखता है। यह उन लोगों के लिए हथियार है जो सत्ता हस्तांतरित नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में चुनाव पर्यवेक्षक फिर आ रहे हैं। देखते हैं कि वह क्या निर्णय लेते हैं।
गठबंधन परिकल्पना की स्थिति
यह पूछे जाने पर कि पीडीपी.बीजेपी का गठबंधन खत्म होने से क्या इसका फ ायदा नेशनल कांफ्रेंस को मिल सकता है तो उन्होंने कहा कि वे लहर की संभावना का अनुमान नहीं लगाते। ऐसा करना चुनाव में खुद को नुकसान पहुंचाना है। कहा कि देश तथा जम्मू-कश्मीर के वोटर में अंतर है। इतनी जल्दी जम्मू-कश्मीर की जनता अपना मूड नहीं बनाती है। जब उनसे पूछा गया कि क्या त्रिशंकु जनादेश आने पर दो पार्टियों के बीच गठबंधन होगा तो उन्होंने कहा कि यह परिकल्पना वाली स्थिति है।
नेकां सभी 87 सीटों पर लड़ेगी
उमर ने कहा कि राज्य में जब कभी विधानसभा चुनाव होंगे तो पार्टी सभी 87 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उम्मीद है कि जनता एक दल को भारी बहुमत देगी। जम्मू-कश्मीर के लोग गठबंधन की सरकार से परेशान हो चुके हैं और वह सत्ता के लिए एक पार्टी को चुनकर भेजेंगे। हम इसके लिए ही काम कर रहे हैं।
गठबंधन परिकल्पना की स्थिति
यह पूछे जाने पर कि पीडीपी.बीजेपी का गठबंधन खत्म होने से क्या इसका फ ायदा नेशनल कांफ्रेंस को मिल सकता है तो उन्होंने कहा कि वे लहर की संभावना का अनुमान नहीं लगाते। ऐसा करना चुनाव में खुद को नुकसान पहुंचाना है। कहा कि देश तथा जम्मू-कश्मीर के वोटर में अंतर है। इतनी जल्दी जम्मू-कश्मीर की जनता अपना मूड नहीं बनाती है। जब उनसे पूछा गया कि क्या त्रिशंकु जनादेश आने पर दो पार्टियों के बीच गठबंधन होगा तो उन्होंने कहा कि यह परिकल्पना वाली स्थिति है।
नेकां सभी 87 सीटों पर लड़ेगी
उमर ने कहा कि राज्य में जब कभी विधानसभा चुनाव होंगे तो पार्टी सभी 87 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उम्मीद है कि जनता एक दल को भारी बहुमत देगी। जम्मू-कश्मीर के लोग गठबंधन की सरकार से परेशान हो चुके हैं और वह सत्ता के लिए एक पार्टी को चुनकर भेजेंगे। हम इसके लिए ही काम कर रहे हैं।