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जम्मू-कश्मीरः पांच साल से कम उम्र के 77 फीसदी बच्चे बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित

Tue, 30 Jun 2020 01:57 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Tue, 30 Jun 2020 01:57 AM IST
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Jammu and Kashmir: 77 perent children below five years of age are denied basic health facilities
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI

जम्मू-कश्मीर में पांच साल से कम उम्र के 77 फीसदी बच्चो को कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन के दौरान टीकाकरण जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं मिल पायीं। यह बच्चों के स्वास्थ्य लिए काफी गंभीर मसला है। इसका खुलासा सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में किया गया है। यह रिपोर्ट बच्चों के लिए काम करने वाली एक सामाजिक संस्था बाल अधिकार और आप (क्राई) ने तैयार की है।

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क्राई ने लॉकडाउन एक और दो के दौरान रैपिड ऑनलाइन परसेप्शन स्टडी में जम्मू-कश्मीर के 387 लोगों को शामिल किया। इसका उद्देश्य था कि लॉकडाउन के दौर में बच्चों को मिलने वाली बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में पता लगाना। इस सर्वेक्षण के परिणाम काफी झटके देने वाले हैं। यह सर्वे सिर्फ जम्मू-कश्मीर ही नहीं बल्कि देश के 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किए गए थे।
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राष्ट्रीय स्तर यह पाया गया कि 50 फीसदी बच्चे टीकाकरण सेवाओं का उपयोग नहीं कर पाए। जम्मू-कश्मीर में यह आंकड़ा 77.14 फीसदी है। सर्वेक्षण में शामिल इस केंद्र शासित प्रदेश के 35 प्रतिशत लोगों ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान उन्हें टीकाकरण संबंधी कोई सहायता नहीं मिली, जिसके कारण बच्चों को बीमारियों और स्वास्थ्य संबंधी खतरों का सामना करना पड़ा।
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41 फीसदी घरों तक पहुंचीं ऑनलाइन कक्षाएं
इस अध्ययन में बच्चों के शिक्षा संबंधी पहलुओं को भी शामिल किया गया था, ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि स्कूल बंद होने के कारण उसके स्थान पर शुरू किए गए ऑनलाइन क्लासेज का कितने बच्चों ने फायदा उठाया। राष्ट्रीय स्तर पाया गया कि सिर्फ 41 फीसदी बच्चों के घरों तक ऑनलाइन कक्षाओं का लाभ पहुंच सका।


बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ा
लगभग 90 प्रतिशत माता-पिता और अभिभावक ने बताया कि लॉकडाउन ने उनके बच्चे के स्क्रीन समय को काफी हद तक बढ़ा दिया है। लगबग 50 फीसदी घरों मे ऑनलाइन गतिविधियां बढ़ गईं।

बच्चों पर नजर रख रहे
एनजीओ ने कहा कि सर्वे में शामिल लगभग 76 प्रतिशत माता-पिता इस बात पर सहमत हैं कि वे कुछ हद तक अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधि पर नजर रख सकते हैं।

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