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अंधेरे से लड़ने वालों पर मौत का साया
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Mon, 13 Apr 2015 01:04 PM IST
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दूसरों के घरों में बिजली न जाने पाए, इसके लिए लाइनमैन दिन-रात काम करते रहते हैं। उनका काम जितना चुनौतीपूर्ण है, समस्याएं उतनी ही ज्यादा। हालत तो यह है कि हमेशा ही बिजली से खेलने वालों के पास उसके जानलेवा झटकों से बचने के लिए जरूरी साजो-सामान तक नहीं हैं।
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उनका यह दर्द काम के बोझ तले सिसकियां भरता रहता है, लेकिन विभागीय अधिकारियों को सुनाई नहीं देता। कब लाईनमैनों पर मौत झपट्टा मार जाए कोई नहीं जानता।
बिलावर में एक लाइनमैन पर आमतौर पर आठ ट्रांसफार्मर की जिम्मेदारी है। जिम्मेदारी भी ऐसी कि किसी भी समय इन्हें मौके पर जाना पड़ सकता है। वे अपनी जान जोखिम में डालकर हमारे घरों को रोशन करते हैं, क्योंकि उनके पास बिजली के झटकों से बचने के लिए सामान नहीं हैं।
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यही वजह अभी तक कई लाइनमैन काम करते वक्त या तो अपनी जान गवां चुके हैं या फिर जीवन भर के लिए अपाहिज बन गए हैं। यदि अस्थाई लाइनमैनों को छोड़ भी दें, तो एक स्थाई लाइनमैन को कम से कम 28 बिजली स्टेशन देखने पड़ते हैं।
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ऐसे में सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि ये अपने इलाके की जनता के साथ कैसे इंसाफ कर पाएंगे। सब डिवीजन बिलावर में लाइनमैनों को पिछले कई वर्षों से सुरक्षा किट न मिलने से जान जोखिम में डालकर बिजली के काम करने पड़ रहे हैं।
नाम न छापने की शर्त पर कुछ लाइनमैनों ने बताया कि पिछले 10-15 वर्षों से वे बिना सुरक्षा किट काम रहे हैं। काम का बोझ बहुत ज्यादा है लेकिन न लाइनमैनों की संख्या बढ़ाई जा रही है और न ही सुविधाएं ही दी जा रही हैं।