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घाटी में टारगेट किलिंग : तालिबान की तरह कश्मीर में इस्लामिक जिहाद की साजिश

Sun, 10 Oct 2021 04:52 AM IST
दुष्यंत शर्मा बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 10 Oct 2021 04:52 AM IST
सार

घाटी में अशांति फैलाने में नाकाम पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का नया हथकंडा। पंडितों की घर वापसी और कश्मीर में बाहरी निवेश पर बौखलाहट में की जा रहीं टारगेट किलिंग। 

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Like Taliban Islamic Jihad Conspiracy in Kashmir
demo pic... - फोटो : प्रयागराज

विस्तार

कश्मीर में अल्पसंख्यकों की टारगेट किलिंग के पीछे पाकिस्तान की आईएसआई का हाथ है। यह सब तालिबान की तर्ज पर इस्लामिक जिहाद को कश्मीर में बढ़ावा देने की नई साजिश का हिस्सा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार अफगानिस्तान में तालिबानियों के राज के बाद पाकिस्तान के हौसले बढ़े हुए हैं। अब पाकिस्तान भारत को कश्मीर के जरिये अस्थिर करने के लिए व्यापक पैमाने पर हिंसा, सोशल मीडिया के जरिये झूठ का प्रचार और कट्टरता का बीज बोने की कोशिश करेगा। 

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रक्षा विशेषज्ञ बताते हैं कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद से तिलमिलाया पाकिस्तान कश्मीर में कुछ नहीं कर सका। तमाम साजिशों के बावजूद घाटी में अशांति फैलाने के उसके मंसूबे कामयाब नहीं हो सके। न अलगाववादी मोहरे काम आए और न पत्थरबाजी और कश्मीर बंद रखने की साजिशें। अलगाववाद को बढ़ावा देने वाले कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं ने इस झूठ को भी प्रचारित किया कि 370 हटने से कश्मीर की डेमोग्राफी में बदलाव आएगा। बाहरी लोग आ जाएंगे। वह यहां निवेश करेंगे। यहां की जमीनों और रोजगार पर उनका कब्जा हो जाएगा। लेकिन यह झूठ भी परवान नहीं चढ़ सका। 
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विशेषज्ञों ने बताया कि पिछले दो साल में सुरक्षा बलों के हौसले बुलंद रहे। लगभग सभी आतंकी तंजीमों के कमांडर मार गिराए गए। पत्थरबाजी थम गई। युवाओं की भर्ती बंद हो गई। न तो जमात और न ही अलगाववादियों की ओर से स्वर उठे। बदले कश्मीर के लोग रोजगार और विकास की राह देखने लगे। बदली परिस्थितियों में केंद्र सरकार ने कश्मीरी पंडितों की घर वापसी की तैयारियां तेज कर दीं। पिछले कुछ समय से पंडितों की जमीन से कब्जे हटाए जा रहे हैं। 
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इन बदलावों के बीच पिछले दो साल से पाकिस्तान मौके की तलाश में था। तालिबान राज के बाद बढ़े हुए हौसले के साथ ही उसने टारगेट किलिंग का हथकंडा अपनाया है। इससे अल्पसंख्यकों में दहशत का माहौल बनाया जा रहा है। यह सब पंडितों की घर वापसी और बाहरी निवेश को रोकने के लिए किया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस प्रमुख डॉ. एसपी वैद कहते हैं कि आईएसआई ने अपनी रणनीति बदलते हुए इस्लामिक आतंकवाद का खेल खेलने की साजिश रची है। वह पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर वैसे लोगों को निशाना बना रहा है जिन्होंने आतंकवाद के चरम में भी घाटी नहीं छोड़ी। 


राष्ट्रवाद का झंडा बुलंद करने वाले भी टारगेट किए जा रहे हैं। इसके अलावा आतंकियों के पास हथियारों की कमी भी हो गई है। टारगेट किलिंग के लिए न तो आतंकियों की ज्यादा संख्या और न ही ज्यादा हथियारों की जरूरत होती है। निहत्थे लोगों को शिकार बनाकर दहशत का माहौल बनाया जा रहा है। सरकार को जल्द से जल्द ऐसे तत्वों की पहचान कर उनका सफाया करना होगा।

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