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Leh : लेह में भारतीय सेना के हिम-ड्रोन-ए-थॉन 2 का आगाज, स्वदेशी तकनीक से सैन्य संचालन में क्रांति की पहल
Wed, 18 Sep 2024 12:48 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, लेह
अमर उजाला नेटवर्क, लेह
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 18 Sep 2024 12:48 AM IST
सार
इसका उद्देश्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैन्य अभियानों को ड्रोन तकनीक के उपयोग से क्रांतिकारी रूप से बदलना है।
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आत्मनिर्भरता की ओर...
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारतीय सेना ने भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ के सहयोग से ‘हिम-ड्रोन-ए-थॉन’ के दूसरे संस्करण का आयोजन किया। इसका उद्देश्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैन्य अभियानों को ड्रोन तकनीक के उपयोग से क्रांतिकारी रूप से बदलना है। यह आयोजन 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित लद्दाख के चुनौतीपूर्ण इलाके वारी ला पास में हुआ, जिसने आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत स्वदेशी तकनीक के उपयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
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हाल के यूक्रेन और इजराइल के संघर्षों में देखा गया है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ‘हिम-ड्रोन-ए-थॉन 2’ का उद्देश्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में निगरानी, लॉजिस्टिक्स, सटीक हमलों और संचार के लिए ड्रोन के संचालन क्षमता का आकलन करना था। इस आयोजन में 20 से अधिक ड्रोन निर्माताओं ने भाग लिया, जिन्होंने लूटिंग म्यूनिशन्स, ड्रोन स्वार्म्स और फर्स्ट-पर्सन व्यू संचालन जैसी विभिन्न प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया।
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लद्दाख के कठोर वातावरण ने इन ड्रोन तकनीकों के लिए एक वास्तविक परीक्षण स्थल के रूप में काम किया, जिसमें भारतीय सेना ने प्रत्येक उत्पाद के प्रदर्शन का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया। लॉजिस्टिक्स और फर्स्ट-पर्सन व्यू श्रेणियों में विजेताओं को विशेष सम्मान दिया गया, और प्रतिभागियों को उनके नवाचारों के लिए सराहा गया। कुछ उत्पादों के लिए सुधार के सुझाव भी दिए गए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि भारतीय सेना तकनीकी विकास के प्रति निरंतर प्रतिबद्ध है।
‘हिम-ड्रोन-ए-थॉन 2’ भारतीय सेना के 2024 के तकनीकी अवशोषण का वर्ष विजन और रक्षा आत्मनिर्भरता (रक्षा आत्मनिर्भरता) के व्यापक लक्ष्य के साथ मेल खाता है। इस पहल के माध्यम से, रक्षा क्षेत्र और भारतीय ड्रोन निर्माताओं के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया गया है, जो भारत को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक के वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखता है। इससे नवाचार, निर्यात के अवसर और सैन्य क्षमताओं को बढ़ावा मिलेगा। जैसे-जैसे भारत अपने रक्षा आधुनिकीकरण प्रयासों को तेज कर रहा है, हिम-ड्रोन-ए-थॉन 2 जैसे कार्यक्रम स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जो सैन्य और नागरिक दोनों प्रकार के अनुप्रयोगों के लिए अत्यधिक चुनौतीपूर्ण वातावरण में लाभकारी होंगे।