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Leh Update: हिंसा के बाद लेह में कर्फ्यू एक दिन और बढ़ा, कारगिल भी बंद रहा; स्कूलों-कॉलेजों में आज भी छुट्टी

Fri, 26 Sep 2025 01:06 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/लेह
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/लेह Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 26 Sep 2025 01:06 AM IST
सार

कर्फ्यू एक दिन और बढ़ा दिया गया है। 26 सितंबर को भी स्कूल-कॉलेज सब बंद रहेंगे। कारगिल भी बंद रहा। इस बीच गृह मंत्रालय की एक टीम ने लेह पहुंचकर स्थिति की समीक्षा की।

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Leh : Curfew extended for one more day in Leh following violence, schools and colleges closed today
लेह में हिंसा के दौरान सड़क पर पड़े पत्थर, file - फोटो : PTI

विस्तार

छठी अनुसूची और पूर्ण राज्य की मांग को लेकर बुधवार को हिंसक हुए आंदोलन के बाद वीरवार को लेह में तनावपूर्ण शांति रही। यहां कर्फ्यू एक दिन और बढ़ा दिया गया है। 26 सितंबर को भी स्कूल-कॉलेज सब बंद रहेंगे। कारगिल भी बंद रहा। इस बीच गृह मंत्रालय की एक टीम ने लेह पहुंचकर स्थिति की समीक्षा की। टीम ने लेह एपेक्स बॉडी, कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के प्रतिनिधियों के साथ ही स्थानीय सांसद को दिल्ली बुलाया है, जहां 27-28 सितंबर को उनकी बैठक होगी और स्थानीय हितों से जुड़ी मांगों पर चर्चा की जाएगी। इस बीच लेह में किसी अप्रिय स्थिति की आशंका के मद्देनजर 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।

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लेह में वीरवार सुबह आम दिनों से अलग गुजरी। माहौल तनावपूर्ण रहा। दिन भर सुरक्षा बलों की गश्त जारी रही। बुधवार की हिंसा को देखते हुए लोग आशंकित नजर आए। हालांकि कहीं कोई अप्रिय घटना नहीं घटी। इस बीच लेह हिंसा के दौरान मारे गए प्रदर्शनकारियों की पहचान हो गई।मृतकों में स्कुरबुचन के त्सेवांग थारचिन (46), खरनालिंग के जिग्मेट दोर्जे (25), इगू के स्टैनजिन नामग्याल (23) और हनु (आर्यन घाटी) के रिनचेन दादुल (20) शामिल हैं। इनके शव परिजन को सौंप दिए गए। स्थानीय परंपरा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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वहीं, 87 घायल हैं जिनमें से 15 की हालत गंभीर है और अन्य को मामूली चोटें आई हैं। इनमें से गंभीर रूप से घायल जिसकी सर्जरी के लिए पहले हवाई मार्ग से दिल्ली ले जाया जाना था फ्लाइट के उतर न पाने के बाद एसएनएम अस्पताल में आपातकालीन सर्जरी की गई। सर्जरी सफल रही।
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हिंसा भड़काने के आरोपी कांग्रेस नेता फुंस्टोक स्टेंजिन अभी पुलिस की पहुंच से दूर
अपर लेह के काउंसलर और कांग्रेस के नेता फुंस्टोक स्टेंजिन अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। उन पर बुधवार को लेह में चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने का आरोप है।

कारगिल में दुकान, बाजार सब बंद रहे, वाहन भी नहीं चले
वीरवार को कारगिल भी पूरी तरह बंद रहा। डेमोक्रेटिक अलायंस की ओर से लेह एपेक्स बॉडी की मांगों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए वीरवार के लिए बंद का एलान किया गया था। यहां दुकानें, बाजार व परिवहन सभी कुछ ठप रहा। इससे जनजीवन पूरी तरह अस्तव्यस्त रहा।

लद्दाख में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करें : एलजी
उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक कर लेह में हालात की समीक्षा की। उन्होंने विरोध-प्रदर्शन के बाद लद्दाख में पैदा हुई स्थिति का आकलन किया। एलजी ने अधिकारियों को लद्दाख में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए। यह भी कहा कि हालात को देखते हुए सतर्कता बरतते हुए एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर काम किया जाए।

केंद्र लचीला रुख अपनाए : डॉ. जफर अखून
लेह स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद यानी एलएएचडीसी, कारगिल के चेयरमैन डॉ. जफर अखून ने बंद शांतिपूर्ण गुजरने पर राहत जताई। उन्होंने एक बार फिर केंद्र से लद्दाख के मामले में अपना रुख लचीला रखने और बातचीत शुरू करने की बात दोहराई। उन्होंने छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग को जायज बताते हुए कहा कि इस मामले में जल्द से जल्द बात शुरू करना बेहद जरूरी है।

हिंसा और मौतों की निष्पक्ष जांच हो : मो. हनीफा
लद्दाख से सांसद मोहम्मद हनीफा ने प्रदर्शनकारी युवकों की मौत के मामले में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की है। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों को राहत देने और मौतों के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई किए जाने की मांग की। केडीए के को-चेयरमैन हाजी असगर अली करबलाई ने भी लेह हिंसा समेत प्रदर्शनकारियों की मौत की जांच की मांग की। उन्होंने लद्दाख प्रशासन पर उत्पीड़न का आरोप जड़ा।

केंद्र सरकार लेह के साथ प्रदेश की जनता की तरफ ध्यान दे : उमर
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि लेह की जनता को नकारा गया जिसका परिणाम बुधवार को वहां हिंसा के रूप में देखने को मिला। केंद्र सरकार को लेह के साथ प्रदेश की जनता की तरफ ध्यान देना चाहिए। भाजपा पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, भाजपा के नेता लेह में हुई हिंसा के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार मान रहे हैं लेकिन अगर लेह में कांग्रेस इतनी मजबूत होती तो काउंसिल उन्हीं की बनती। स्थिति को संभालना सरकार का काम होता है। वे हमेशा अपना कसूर नहीं मानते और दूसरे को दोषी ठहराते हैं। उन्होंने लेह के लोगों से अपील की कि वे कानून को अपने हाथों में नहीं लें और आपसी भाईचारा व शांति बनाए रखें।


गृह मंत्रालय बलि का बकरा बनाने वाली रणनीति अपना रहा
ऐसे आरोप कि हिंसा मेरी ओर से या कांग्रेस की ओर से भड़काई गई, समस्या के मूल को संबोधित करने के बजाय बलि का बकरा ढूंढने जैसा है। इससे किसी को लाभ नहीं होगा। माना कि वे (गृह मंत्रालय) बलि का बकरा बनाने में चतुर हो सकते हैं, लेकिन वे बुद्धिमान नहीं हैं। इस समय हम सभी को चतुराई के बजाय बुद्धि की जरूरत है क्योंकि युवा पहले से ही निराश हैं।
-सोनम वांगचुक
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