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जम्मू संभाग में वकीलों की हड़ताल से अदालती कामकाज ठप, दूसरे दिन भी काम पर नहीं आए अधिवक्ता

Sat, 02 Nov 2019 06:45 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: Pranjal Dixit Updated Sat, 02 Nov 2019 06:45 PM IST
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Lawyer strike in Jammu division halts court work, advocates not working for second day
सांकेतिक तस्वीर
जम्मू संभाग के अधिकतर हिस्सों में शनिवार को उच्च न्यायालय और निचली अदालतों के वकीलों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण कामकाज ठप रहा। ये वकील विभिन्न दस्तावेजों को पंजीकृत करने के न्यायिक अदालतों के अधिकार को छीनकर उसे राजस्व विभाग के हवाले करने के हालिया फैसले के खिलाफ बेमियादी हड़ताल पर हैं। बार एसोसिएशन उच्च न्यायालय को जानीपुर से शहर के बाहरी इलाके में स्थानांतरित किए जाने के प्रस्ताव का भी विरोध कर रही है। जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन की जम्मू इकाई ने शुक्रवार को हड़ताल का आह्वान किया। 
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वकीलों की हड़ताल के कारण उच्च न्यायालय, जिला अदालतों, अधीनस्थ अदालतों, न्यायाधिकरणों एवं राजस्व अदालतों समेत सभी अदालतों में कामकाज लगातार दूसरे दिन शनिवार को भी ठप रहा। इस स्थिति में कोर्ट पहुंचे वादकारियों को लौटना पड़ा। लगभग सभी मुकदमों में तारीख पड़ गई। सरकार के इस फैसले के खिलाफ भाजपा, कांग्रेस समेत लगभग सभी प्रमुख दलों ने नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि यह बदलाव जनता के हित में नहीं है। 
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इस बीच वित्त आयुक्त राजस्व पवन कोतवाल ने सभी रजिस्ट्रारों के साथ बैठक कर पंजीकरण की प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। कोतवाल को जम्मू-कश्मीर का महानिरीक्षक पंजीकरण बनाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि कोतवाल ने सभी रजिस्ट्रारों को कहा कि वे लोगों को इस बात से अवगत कराएं कि अब पंजीकरण के लिए अतिरिक्त उपायुक्त एवं उपमंडलीय मजिस्ट्रेट अधिकृत हैं ताकि अपने दस्तावेजों के पंजीकरण के लिए उन्हें किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
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हड़ताल उप राज्यपाल के लिए चुनौती
वकीलों की हड़ताल को उपराज्यपाल जीसी मुर्मू के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। 23 अक्तूबर को तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक की अध्यक्षता में राज्य प्रशासनिक परिषद (एसएसी) ने नए विभाग के निर्माण को मंजूरी दी थी। यह बिक्री, उपहार, गिरवी, लीज एवं वसीयत जैसी अचल संपत्ति से संबंधित दस्तावेजों के पंजीकरण को लेकर आम नागरिकों को व्यवधान रहित एवं त्वरित सेवा उपलब्ध कराने के लिए राजस्व विभाग के पूर्ण प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करेगा। इससे पहले राजस्व विभाग सिर्फ  फर्द, इंतखाब, मूल रिकॉर्ड के संदर्भ में संपत्ति का प्रमाणीकरण और जमीन के मूल्य का आकलन जिसके आधार पर उसकी न्यायिक अधिकारियों द्वारा रजिस्ट्री की जाती है के कार्य में शामिल था। 
 

जब तक न्यायिक अदालतों को पंजीकरण का अधिकार फिर से नहीं मिलता तथा कोर्ट को स्थानांतरित किए जाने का फैसला वापस नहीं लिया जाता है तब तक आंदोलन जारी रहेगा।- अभिनव शर्मा, अध्यक्ष, बार एसोसिएशन 

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