VIDEO: टीचर्स ने वेतन मांगा तो बरसीं लाठियां
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एक साल से वेतन नहीं मिलने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे आरईटी अध्यापकों पर पुलिस ने सोमवार को प्रेस क्लब के बाहर लाठीचार्ज कर दिया, जिसमें करीब एक दर्जन अध्यापक जख्मी हो गए। इनमें महिला टीचर भी जख्मी हुईं हैं। अपनी मांगों को लेकर अध्यापकों ने सचिवालय जाने का प्रयास किया था, लेकिन पुलिस ने बल प्रयोग करके उन्हें प्रेस क्लब के बाहर ही रोक लिया।
प्रदर्शनकारियों में से आधा दर्जन अध्यापकों को नवाबाद थाने में हिरासत में रखा। इनमें मारामारी में कुछ अध्यापकों के कपड़े भी फट गए। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के खिलाफ नारेबाजी जारी रखी। जेएंडके आरईटी टीचर फोरम के बैनर तले सोमवार को जम्मू संभाग के अलग-अलग जिलों से अध्यापक इकट्ठा हुए।
करीब 300 अध्यापकों ने प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने एक साल से जम्मू कश्मीर के 60 हजार अध्यापकों का वेतन नहीं दिया। जिस कारण परिवारों का गुजारा चलाना काफी मुश्किल बना हुआ है।
बिना वेतन कराए जा रहे सारे काम
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनसे सारे काम लिए जाते हैं। परीक्षा ड्यूटी, सेंसस सहित अन्य काम उनसे करवाए जाते हैं, लेकिन उन्हें छह-छह महीने और साल से वेतन नहीं दिया गया है। कई बार मंत्रियों, सरकार के प्रतिनिधियों से मिले, लेकिन किसी ने उनके मामले को गंभीरता से नहीं लिया है।
अब तक वे सड़क पर आकर अपना वेतन मांगने के लिए प्रदर्शन कर रहे थे, तो शांतिपूर्वक प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने के लिए उन पर लाठीचार्ज कर दिया। एक दर्जन जख्मी अध्यापकों में कुछ को अस्पताल भी पहुंचाया गया, जबकि कुछ को गिरफ्तार करके नवाबाद थाने ले गए।
प्रदर्शनकारियों में प्रधान विनोद शर्मा, नरेश शर्मा, श्याम शर्मा, सुखदेव सिंह, सुरेश खजूरिया, सज्जाद मलिक, गुलजार बीर, लेख राज, मंजूर खान, बलवान सिंह, महेश कुमार, सुभाष चंद्र, अशोक सेठी, ताहिर मसूद सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
तनाव बढ़ता देख अधिकारी मौके पर पहुंचे
मामला काफी तनावपूर्ण होते देख पुलिस अधिकारी श्रीराम, एसकेएस चौहान, एसएचओ नवाबाद और नायब तहसीलदार केपी सिंह भी पहुंच गए। मामले को शांत करवाया गया।
घरों में राशन हुआ खत्म, उधार मिलना बंद
रियासत में पूरे एक साल वेतन नहीं मिला है। एजूकेशन वालंटियर से स्थायी हुए अध्यापकों को डेढ़ साल से बकाया नहीं मिला। यही नहीं, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में लगे आरआईटी अध्यापकों को 3-3 साल से वेतन नहीं मिला है। अब मिड-डे-मील का भुगतान भी नहीं हो रहा है। जिस कारण शिक्षक भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं और अब मजबूर होकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
लाठीचार्ज के बाद प्रधान विनोद शर्मा और महासचिव नजब जाफरी, यूनुस राही ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर जल्द उनका वेतन नहीं दिया गया तो वे उग्र प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने आने वाले दस दिनों में कोई सकारात्मक फैसला नहीं होने स्थिति में दिल्ली जंतर-मंतर जाकर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।
उन्होंने कहा कि पिछले कई माह से घरों में राशन नहीं है। दुकानों से उधार लेकर परिवारों को पाल रहे हैं, लेकिन अभी तक सरकार ने उनकी कोई सुनवाई नहीं की है।
अब टूटने लगा है सब्र का बांध
कार्यकाल बढ़ाने की मांग को लेकर प्रेस क्लब के बाहर भूख हड़ताल पर बैठे दो और अस्थायी शिक्षकों की हालत सोमवार को बिगड़ गई। दोनों को उपचार के लिए जीएमसी पहुंचाया गया।
अस्थायी शिक्षकों का कहना है कि अब सब्र का बांध टूटने लगा है। अगर सरकार ने जल्द मांग पूरी नहीं की तो आने वाले दिनों में सभी अस्थायी शिक्षक दिल्ली पहुंच कर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने को मजबूर हो जाएंगे।
सोमवार को भूख हड़ताल का 32वां दिन था। अस्थायी शिक्षकों ने सुबह से ही राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया था। दोपहर बाद दो शिक्षकों की हालत बिगड़ गई। तुरंत एंबुलेंस को बुलाकर शिक्षकों को जीएमसी पहुंचाया गया।
भूख हड़ताल का नेतृत्व कर रहे बलविंद्र सिंह पवार ने बताया कि राज्य सरकार की तरफ से अभी तक उनकी मांग को गंभीरता से लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया है, जबकि दिन-ब-दिन परेशानी बढ़ रही है।
कई मंत्रियों के सामने अपनी मांग को शांतिपूर्ण तरीके से रखा है। सबने मांग को पूरा करवाने का आश्वासन दिया, लेकिन किसी ने इसको लेकर कुछ काम नहीं किया। अब अगर शिक्षक दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को मजबूर हो जाएंगे।