छह दिन में जनता के साथ इंसाफ कैसे करेगी सरकार?
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राज्य की 11वीं विधानसभा का आखिरी और 12वां सत्र हंगामे भरा होगा होगा। सत्र की संक्षिप्त अवधि पर विपक्षी दलों ने तेवर कड़े कर लिए। विधानसभा के मानसून सत्र की अवधि 25 से 30 अगस्त तक तय की गई है।
छह दिन के सत्र में चार दिन सिर्फ सरकारी कामकाज ही निपटाया जाएगा। इससे साफ है कि सत्र में साझा सरकार को विपक्ष के सख्त हमलों का सामना करना पड़ेगा।
ऐसे में सवाल उठाए जा रहे हैं क्या छह दिन में सरकार जनता की सभी समस्याओं को दूर कर पाएगी।
'सरकार में मसले हल करने का दम नहीं'
पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और मुजफ्फर हुसैन बेग के लोकसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद मुख्य विपक्षी दल के सीनियर विधायक अब्दुल रहमान वीरी का कहना है कि सरकार में अवामी मसलों का सामना करने का दम नहीं है।
खुद हुकूमत को सोचना चाहिए कि छह दिन में वह कैसे अवाम से इंसाफ करेगी। वीरी के मुताबिक रियासत में हुकूमत का इस समय कोई अस्तित्व नहीं है। नेकां-कांग्रेस हुकूमत का दिवालियापन साफ दिख रहा है।
पानी, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अवाम में हाहाकार मचा हुआ है। जल्द ही पीडीपी विधायक दल की बैठक में रणनीति बनाकर सरकार से सिर्फ औपचारिकता के लिए सत्र के आयोजन पर जवाब तलब किया जाएगा।
छह महीने से नहीं हुई विकास बोर्ड की बैठक
पैंथर्स पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया ने कहा कि सत्र की संक्षिप्त अवधि होने से साफ है कि सरकार विधानसभा चुनाव से पहले ही कोमा में चली गई है।
सरकार के पास विपक्ष के सवालों का जवाब देने का अब दम नहीं है। मौजूदा परिदृश्य में खासकर सत्ता पक्ष के घटक दलों को भी अब एक दूसरे का सामना करना पड़ेगा।
मनकोटिया का कहना है कि जो हुकूमत जिला विकास बोर्ड की बैठकों का आयोजन पिछले छह महीनों में नहीं कर सकी, उसके पास सत्र में जवाब देने के लिए क्या होगा।
इसके बावजूद पैंथर्स विधायक छह दिन के सत्र का भी पूरा फायदा उठाकर अवाम हित में मसले उठाएंगे।
छह दिन का सत्र महज औपचारिकता
पूर्व केंद्रीय मंत्री और जम्मू वेस्ट से विधायक प्रो. चमन लाल गुप्ता का कहना है कि बेहतर होगा कि मौजूदा विधानसभा के आखिरी सत्र की अवधि को बढ़ाया जाए। कम से कम नेकां-कांग्रेस साझा सरकार के साढ़े पांच साल से अधिक के कार्यकाल पर चर्चा सदन में हो।
प्रो. गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य में अरबों रुपये विकास कार्यों के लिए राज्य सरकार को दिए हैं, इसका हिसाब भी सरकार को सदन में देना चाहिए। छह दिन का सत्र महज संवैधानिक औपचारिकता पूरी करने की कवायद से अधिक कुछ नहीं है।
इससे सरकार जनप्रतिनिधियों से और जनप्रतिनिधि भी अवाम से क्या इंसाफ कर पाएंगे।
'पाकिस्तानी गोलीबारी से अवाम परेशान'
भाजपा में पिछले दिनों शामिल हुए निर्दलीय विधायक अश्विनी शर्मा के मुताबिक जम्मू संभाग में अंतरराष्ट्रीय सीमा से लेकर एलओसी तक पाकिस्तानी गोलीबारी से अवाम परेशान है। पीओके रिफ्यूजियों और सीमांत किसानों के मसले लंबित है।
राज्य विधानसभा के स्पीकर मुबारक गुल का कहना है कि जल्द सलाहकार कमेटी की बैठक बुलाकर आम सहमति से सदन की कार्यवाही चलाने पर आमराय बनाएंगे। इस सिलसिले में उन्होंने कमेटी का गठन कर दिया है।
उनका कहना है कि सत्र की अवधि का जारी कैलेंडर अभी प्रस्तावित है। सदन की सहमति से सत्र की अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है।