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Jammu News: जम्मू-कश्मीर में मुसीबत बन सकती हैं ग्लेशियरों से बनी झीलें
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- प्रदेश की 29 झीलों समेत कुल 69 झीलों को असुरक्षित की श्रेणी में रखा गया
- जम्मू संभाग में नौ और कश्मीर संभाग में 20 झीलें इनमें शामिल
- अपर इंडस क्षेत्र में सर्वाधिक 40 ग्लेशियर निर्मित झीलें
प्रवेश कुमारी
जम्मू। उत्तराखंड की तरह जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में ग्लेशियरों से बनी झीलें मुसीबत बन सकती हैं। सरकार की तरफ से गठित मॉनिटरिंग कमेटी के आंकड़ों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर और अपर इंडस क्षेत्र में कुल 69 ऐसी झीलें हैं जिन्हें असुरक्षित की श्रेणी में रखा गया है। इनमें नौ झीलें जम्मू और 20 कश्मीर संभाग में हैं।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित धराली में आई तबाही के पीछे पहले वजह बादल फटना मानी जा रही थी, लेकिन बाद में ग्लेशियर से बर्फ टूटकर गिरने से आई बाढ़, बारिश और भूस्खलन एक साथ हो जाने को इसकी मूल वजह बताया गया। इससे नक्शे से धराली का नामो निशान मिट गया।
विशेषज्ञाें की मानें तो इस तरह की तबाही जम्मू-कश्मीर में भी आ सकती है। कभी भी कुछ भी हो सकता है। प्रदेश में झीलों की मॉनिटरिंग कर रही फोकस्ड ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्ल्ड (एफजीएलओएफ) मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्य और जम्मू विश्वविद्यालय के रिमोट सेंसिंग विभागाध्यक्ष प्रो. अवतार सिंह जसरोटिया के अनुसार उत्तराखंड में आई तबाही को लेकर जम्मू-कश्मीर में भी अध्ययन किया जा रहा है। उनके अनुसार प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में असुरक्षित बनी झीलों का डाटा तैयार किया गया है।
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आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर में ग्लेशियर से बनी झीलों की निगरानी के लिए सरकार ने बीते साल प्रमुख सचिव गृह की अगुवाई में फोकस्ड ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्ल्ड (एफजीएलओएफ) मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया था। इसका काम ग्लेशियरों और इससे बनने वाली झीलों की स्थिति की समीक्षा करना और उनसे जुड़े खतरे को कम करने के लिए उपाय सुझाना था।
जिला असुरक्षित झीलों की संख्या नाम
किश्तवाड़ 04 मुंदिकसर, हंगू, पतला पानी और एक अनाम झील
राजोरी 04 हांडूसर, भगसर, नंदनसर, कदासर
पुंछ 01 अनाम झील
गांदरबल 10 लालगुल सार, गंगबल झील, गाद सार, कृष्णसार, विशन सार, रॉयल सर, यमसार, डोडसार, सोरस और एक अनाम झील
अनंतनाग 06 शेषनाग, मरसार, टरसार, सोरासर, बोडसार, सोनसार
बड़गाम 02 पमसार, बंदसार
कुलगाम 01 कौसरनाग
बांदीपोरा 01 अनाम झील
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17 पैरामीटर्स पर करते हैं असुरक्षित घोषित
झीलों के आकार, द्रव्यमान, तापमान, लोकेशन, मूवमेंट जोन जैसे कुल 17 पैरामीटर्स के आधार पर किसी भी झील को असुरक्षित घोषित किया जाता है। कई बार ग्लेशियर टूटकर झील में गिरते हैं। इससे आकार में बढ़ोतरी हो जाती है। ऐसे में अगर लगातार बारिश रहे तो फ्लैश फ्लड का खतरा बहुत बढ़ जाता है।
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अमरनाथ यात्रा का अहम पड़ाव है शेषनाग
प्रदेश में हर साल अमरनाथ यात्रा का आयोजन किया जाता है। अनंतनाग जिले में स्थित शेषनाग अमरनाथ यात्रा का अहम पड़ाव है। शेषनाग झील को भी असुरक्षित श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में झील को लेकर खतरा और बढ़ जाता है।
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- जम्मू संभाग में नौ और कश्मीर संभाग में 20 झीलें इनमें शामिल
- अपर इंडस क्षेत्र में सर्वाधिक 40 ग्लेशियर निर्मित झीलें
प्रवेश कुमारी
जम्मू। उत्तराखंड की तरह जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में ग्लेशियरों से बनी झीलें मुसीबत बन सकती हैं। सरकार की तरफ से गठित मॉनिटरिंग कमेटी के आंकड़ों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर और अपर इंडस क्षेत्र में कुल 69 ऐसी झीलें हैं जिन्हें असुरक्षित की श्रेणी में रखा गया है। इनमें नौ झीलें जम्मू और 20 कश्मीर संभाग में हैं।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित धराली में आई तबाही के पीछे पहले वजह बादल फटना मानी जा रही थी, लेकिन बाद में ग्लेशियर से बर्फ टूटकर गिरने से आई बाढ़, बारिश और भूस्खलन एक साथ हो जाने को इसकी मूल वजह बताया गया। इससे नक्शे से धराली का नामो निशान मिट गया।
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विशेषज्ञाें की मानें तो इस तरह की तबाही जम्मू-कश्मीर में भी आ सकती है। कभी भी कुछ भी हो सकता है। प्रदेश में झीलों की मॉनिटरिंग कर रही फोकस्ड ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्ल्ड (एफजीएलओएफ) मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्य और जम्मू विश्वविद्यालय के रिमोट सेंसिंग विभागाध्यक्ष प्रो. अवतार सिंह जसरोटिया के अनुसार उत्तराखंड में आई तबाही को लेकर जम्मू-कश्मीर में भी अध्ययन किया जा रहा है। उनके अनुसार प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में असुरक्षित बनी झीलों का डाटा तैयार किया गया है।
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आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर में ग्लेशियर से बनी झीलों की निगरानी के लिए सरकार ने बीते साल प्रमुख सचिव गृह की अगुवाई में फोकस्ड ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्ल्ड (एफजीएलओएफ) मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया था। इसका काम ग्लेशियरों और इससे बनने वाली झीलों की स्थिति की समीक्षा करना और उनसे जुड़े खतरे को कम करने के लिए उपाय सुझाना था।
जिला असुरक्षित झीलों की संख्या नाम
किश्तवाड़ 04 मुंदिकसर, हंगू, पतला पानी और एक अनाम झील
राजोरी 04 हांडूसर, भगसर, नंदनसर, कदासर
पुंछ 01 अनाम झील
गांदरबल 10 लालगुल सार, गंगबल झील, गाद सार, कृष्णसार, विशन सार, रॉयल सर, यमसार, डोडसार, सोरस और एक अनाम झील
अनंतनाग 06 शेषनाग, मरसार, टरसार, सोरासर, बोडसार, सोनसार
बड़गाम 02 पमसार, बंदसार
कुलगाम 01 कौसरनाग
बांदीपोरा 01 अनाम झील
17 पैरामीटर्स पर करते हैं असुरक्षित घोषित
झीलों के आकार, द्रव्यमान, तापमान, लोकेशन, मूवमेंट जोन जैसे कुल 17 पैरामीटर्स के आधार पर किसी भी झील को असुरक्षित घोषित किया जाता है। कई बार ग्लेशियर टूटकर झील में गिरते हैं। इससे आकार में बढ़ोतरी हो जाती है। ऐसे में अगर लगातार बारिश रहे तो फ्लैश फ्लड का खतरा बहुत बढ़ जाता है।
अमरनाथ यात्रा का अहम पड़ाव है शेषनाग
प्रदेश में हर साल अमरनाथ यात्रा का आयोजन किया जाता है। अनंतनाग जिले में स्थित शेषनाग अमरनाथ यात्रा का अहम पड़ाव है। शेषनाग झील को भी असुरक्षित श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में झील को लेकर खतरा और बढ़ जाता है।