फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   KOUNSAR Naag LAKE

Jammu News: कौनसर नाग झील में नागपंचमी पर स्नान करेंगे श्रद्धालु

विज्ञापन
KOUNSAR Naag LAKE
रियासी के दुर्गम पहाड़ी इलाके में स्थित झील। 
- वार्षिक छड़ी यात्रा 26 जुलाई को बारादरी स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर से शुरू होगी
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
रियासी। जिला के पहाड़ी व दुर्गम क्षेत्र में स्थित कौनसर नाग झील को जाने वाली वार्षिक यात्रा में शामिल श्रद्धालु इस बार 19 जुलाई को नाग पंचमी पर स्नान करेंगे। यात्रा की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। सोमवार को यात्रा कमेटी के सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल डिप्टी कमिश्नर के साथ मुलाकात करेगी।
बता दें कि 26 जुलाई को छड़ी यात्रा बारादरी स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर से निकाली जाएगी। छड़ी यात्रा में शामिल लोग नगर के आप शंभू महादेव मंदिर में माथा टेकने के बाद नई बस्ती के शिव मंदिर में रात्रि विश्राम करेंगे। 27 जुलाई को छड़ी यात्रा सुबह रियासी से सुनगढ़ी चसाना को रवाना होगी। यहां रात को यात्रा विश्राम करेगी। 28 जुलाई को सरी के लिए रवाना होकर वहां रात को रुकेगी।
विज्ञापन

सरी से यात्री सुबह पवित्र झील में पहुंच स्नान कर पूजा-अर्चना करेंगे। निशांत मगोत्रा ने बताया कि दुर्गम इलाके में स्थित झील तक पहुंचने के लिए काफी रास्ता पैदल तय करना पड़ता है। वहां के स्थानीय ग्रामीण रास्ते को ठीक करने का काम कर रहे हैं। पिछले दिनों प्रशासनिक अधिकारियों साथ एक बैठक में अहम मुद्दों पर चर्चा हुई थी। अब यात्रा के शेड्यूल को लेकर डीसी से मुलाकात कर उन्हें बताया जाएगा। इसके साथ ही यात्रा में जाने वाले लोगों की संख्या के बारे में जानकारी दी जाएगी ताकि वहां किसी को कोई परेशानी नहीं हो।
विज्ञापन
विज्ञापन


पौराणिक कथा में भी मिलता है कौनसर नाग की पवित्र झील का उल्लेख
कौनसर नाग की पवित्र झील का उल्लेख पौराणिक कथा में भी मिलता है। बताया जाता है कि भगवान विष्णु के एक पांव के रखने से झील का निर्माण हुआ था। झील में नाग पंचमी के अवसर पर स्नान करने का विशेष महत्व माना जाता है। झील का एक छोर रियासी जिला की तहसील चसाना के दूरदराज ग्रामीण क्षेत्र साथ लगता है वहीं दूसरा छोर कश्मीर के शोपियां जिला की पहाड़ी साथ जुड़ा है। झील तक पहुंचने के लिए एक दिन का पैदल सफर तय करना पड़ता है। इसमें ऊंची पहाड़ी के साथ ही बर्फीली पहाड़ी व नालों से होकर गुजरना पड़ता है। यात्रा में जाने वाले श्रद्धालुओं के रुकने खाने-पीने का इंतजाम स्थानीय लोगों के कच्चे घरों या टेंट वगैरह में किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed