जानिए आखिर क्यों भाजपा के साथ जा सकते हैं लोन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रियासत की सियासत में भारी उठापटक देखने को मिल रही है। पिछले सालों में पर्दे के पीछे रहने वाले पूर्व अलगाववादी नेता सज्जाद गनी लोन की भाजपा से नजदीकी तो लंबे समय से देखी जा रही थी लेकिन प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर उन्होंने राज्य की राजनीति में नई हलचल मचा दी है।
सज्जाद के सहारे जहां भाजपा मिशन 44 प्लस का गणित साधने में लगी हैं वहीं लोन भी अपने हितों के लिए भाजपा का दामन थामना चाहते हैं। हालांकि अभी तक लोन ने खुले तौर पर नहीं कहा है कि वह भाजपा के साथ हैं, फिलहाल उन्होंने कहा है कि वह अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ने जा रहे हैं।
अगर लोन भाजपा के साथ चले जाते हैं तो वह उसी मुकाम पर पहुंच सकते हैं जिस पर कभी उनके पिता थे। लोन भाजपा के जेपी नड्डा और राम माधव के संपर्क में हैं, इस महीने में दो बार दोनों से मिल चुके हैं।
घाटी की राजनीति में अपना अस्तित्व बनाए रखने की लिए
लोन 2002 में हंदवाड़ा से विधायक रहे चुके हैं। 2009 में लोन ने राष्ट्रीय राजनीति में हाथ आजमाने के लिए बारामुला से चुनाव लड़ा लेकिन नेशनल कांफ्रेंस के शरीफुद्दीन शारीक के हाथों उन्हें शिकस्त मिली। हार के बाद से लोन राजनीतिक पटल से गायब हो गए थे। तब लोन ने अपने पिता की पार्टी पीपल्स कांफ्रेंस को फिर से रीवाइव करने का फैसला किया।
उनकी पार्टी कुपवाड़ा और हंदवाड़ा की 12 सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है। बता दें कि घाटी में ऑल पार्टी हुरियत कांफ्रेंस के गठन के पीछे भी उनके पिता अब्दुल गनी लोन का दिमाग था। अब वह फिर से अच्छे दिनों के लिए संघर्ष कर रहे हैं ऐसे में भाजपा उनकी नईया को पार लगा सकती है।
पार्टी के खोए जनाधार को बचाने की कोशिश
बीते पांच सालों में लोन ने गांव-गांव जाकर अपनी खोई हुई रानीतिक जमीन पाने के लिए मेहनत कर कुपवाड़ा और हंदवाड़ा में पार्टी की नींव मजबूत की है। उन्होंने युवा शक्ति को पार्टी से जोड़ा है। आज कुपवाड़ा के हालात पांच साल पहले जैसे नहीं हैं।
मौजूदा हालात में देखा जा रहा है कि लोन की पार्टी अच्छी खासी सीटें झटक सकती है। ऐसे में अगर लोन और भाजपा का गठबंधन हो जाता है तो लोन को रियासत की सियासत में अहम मुकाम हासिल हो सकता है और भाजपा का मिशन भी पूरा हो सकता है। भाजपा के साथ जाकर लोन रियासत का मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं।
अलगाववादी ताकतों में लगातार फूट
लोन घाटी के अकेले ऐसे नेता हैं जो अलगाववाद की धारा से अलग होकर मुख्यधारा में आ रहे हैं। वह अपने पार्टीकार्यकर्ताओं के साथ बराबरी से पेश आते हैं और उनकी लोकप्रियता घाटी में लगातार बढ़ रही है। जब वह रैली करते हैं तो हजारों की भीड़ सड़कों पर उतर आती है। अब देखने वाली बात ये होगी कि यह भीड़ वोट बैंक में कनर्वट हो पाती है या नहीं।
केवल भाजपा ही नहीं अन्य दल भी लोन के संपर्क में हैं। बीते शनिवार को पीडीपी के नेता निजामुद्दीन बट ने भी लोन से मुलाकात की थी, लेकिन इस मुलाकात के बाद लोन ने इस बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। संभव है कि चुनावों के बाद लोन अपने पत्ते खोलें। ऐसे में पीडीपी के साथ जाने से बेहतर है कि वह भाजपा के साथ जाएं।
पाकिस्तान से भी है कनेक्शन
सज्जाद और उनके भाई बिलाल के संबंध अच्छे नहीं है। दोनों भाई अलग रहते हैं। दोनों भाईयों के अलगाव के बाद उन्होंने पीपल्स कांफ्रेंस का भी बंटवारा कर लिया। पार्टी के साथ ही घर का भी बंटवारा हो चुका है। पंद्रह फीट की एक दीवार घर को बंटती है।
लोन के ससुर आमनउल्ला खान बंटवारे से पहले कश्मीर के नामी नेता रहे हैं जो अब पाकिस्तान में रहते हैं। अगर भाजपा और लोन एक साथ आते हैं तो लोन के सहारे भाजपा पाकिस्तान के साथ चल रही समस्याओं पर फिर से विचार कर सकती है।
कौन है सज्जाद लोन
सज्जाद गनी लोन का जन्म 1967 में हुआ था। वह घाटी के कद्दावर नेता अब्दुल गनी लोन के पुत्र हैं। लोन ने लंदन की कार्डिफ यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में डिग्री की है।
अब्दुल गनी लोन की हत्या 21 मई 2002 को श्रीनगर में एक रैली के दौरान कर दी गई थी। जिसके बाद सज्जाद लोन पीपल्स कांफ्रेंस के चैयरमेन बनाए गए थे।
लोन के भाई बिलाल गनी लोन मिरवाइजर उमर फारूक की हुरियत कांफ्रेंस में एक्जिक्यूटिव मेंबर हैं।