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कठुआ दुष्कर्म मामला: अभियुक्त शुभम सांगरा पर वयस्क के तौर पर चलेगा मुकदमा- सुप्रीम कोर्ट

Wed, 16 Nov 2022 12:17 PM IST
kumar गुलशन कुमार एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Wed, 16 Nov 2022 12:17 PM IST
सार

कठुआ दुष्कर्म और हत्या मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभियुक्त शुभम सांगरा पर नाबालिग के तौर पर नहीं बल्कि वयस्क के तौर पर मुकदमा चलेगा।

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Kathua rape case: Supreme Court orders Accused Shubham Sangra be tried as adult not minor
कठुआ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कठुआ दुष्कर्म और हत्या मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कठुआ और जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों को रद्द कर दिया, जिसमें अभियुक्त को मुकदमे के लिए किशोर माना गया था।

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न्यायमूर्ति जेबी पर्दीवाला ने फैसला सुनाते हुए आरोपी शुभम सांगरा पर वयस्क के रूप में मुकदमा चलाने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत का फैसला केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर द्वारा सीजेएम और उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों को चुनौती देने वाली अपील पर आया है।
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अदालत ने कहा कि आरोपी की उम्र के बारे में चिकित्सा विशेषज्ञ का अनुमान सबूत का वैधानिक विकल्प नहीं है और यह केवल एक राय है। आरोपी को 2019 में कठुआ के एक गांव में आठ साल की बच्ची से सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था। जून 2019 में पठानकोट की एक विशेष अदालत ने मामले में तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

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क्या और कब का है मामला

जम्मू संभाग के जिला कठुआ में गांव रसाना की 8 साल की बच्ची 10 जनवरी 2018 को लापता हो गई थी। बच्ची को काफी तलाशने के बाद पिता ने 12 जनवरी को हीरानगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। लापता होने के 7 दिनों बाद 17 जनवरी को जंगल में बच्ची की लाश क्षत-विक्षत हालत में मिली।

बच्ची अपने परिवार के साथ रहती थी। खानाबदोश मुस्लिम समुदाय से थी। उस बकरवाल समुदाय से, जो कठुआ में अल्पसंख्यक है। बच्ची के साथ हुई हैवानियत के विरोध में परिजनों ने प्रदर्शन किया और हाईवे जाम कर दिया। 18 जनवरी को एक आरोपी का सुराग लगा और उसे दबोच लिया गया।

22 जनवरी को पुलिस ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी। इस बीच कुछ लोग आरोपियों के पक्ष में खड़े हो गए। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (जम्मू) भी इस आंदोलन में शरीक हो गया। नतीजतन 9 अप्रैल को चार्जशीट दाखिल नहीं हो पाई। फिर क्राइम ब्रांच ने 10 अप्रैल को चार्जशीट दाखिल की।


वकीलों ने इसका विरोध करते हुए 11 अप्रैल और 12 अप्रैल को पूरे जम्मू-कश्मीर का बंद बुलाया और वे कठुआ जिला जेल के बाहर लगातार प्रदर्शन करते रहे। पीड़ित परिवार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला कठुआ से पठानकोट की सेशन कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया।

कोर्ट ने 8 जून 2018 को सात आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म और हत्या के आरोप तय किए थे। केस में कुल 221 गवाह बनाए गए हैं। 55वें गवाह के रूप में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर पेश हुए। 56वें गवाह के रूप में फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी के एक्सपर्ट को पेश किया गया। जब से केस की सुनवाई शुरू हुई, तब से अब तक सभी तारीखों पर सुनवाई की वीडियोग्राफी कराई गई है। इनमें एक किशोर आरोपी के खिलाफ मुकदमा शुरू होना अभी बाकी है

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