कठुआ कांड: फोरेंसिक सबूतों की बरामदगी पर उठे सवाल, सबूतों की सत्यता संदिग्ध
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कठुआ कांड में फोरेंसिक सबूतों की बरामदगी भी संदेह के घेरे में है। बाल के जिस नमूने को क्राइम ब्रांच मजबूत सबूत के तौर पर पेश कर रही है, वह आरोपी की गिरफ्तारी के बाद बरामद किया गया। इसे यूं समझें कि क्राइम ब्रांच ने पहले आरोपी को गिरफ्तार किया फिर मौका-ए-वारदात से उसके बाल का नमूना बरामद किया। यही वजह है कि कानूनी जानकार सबूतों की सत्यता को संदिग्ध मान रहे हैं।
चार्जशीट के मुताबिक इलाके के ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने घटनास्थल देवस्थान पर दो बार क्राइम ब्रांच की टीम के साथ सबूतों को जमा किया था। दो फरवरी 2018 की रिपोर्ट के अनुसार नाबालिग के बाल, गले के हार का नीले रंग का हेड, कुछ छड़ी, मिट्टी और खून के धब्बों को सीज किया गया था। क्राइम ब्रांच ने सीजर मेमो तैयार किया है। इसके बाद पांच फरवरी को क्राइम ब्रांच की टीम का दोबारा फोन आया। छह फरवरी को टीम के साथ ड्यूटी मजिस्ट्रेट दोबारा घटनास्थल पर पहुंचे। देवस्थान पर जाकर दोबारा जांच की। करीब 133 मीटर दूर एक पुली के नीचे की भी जांच की। पुली से कुछ छड़ी और अन्य सामान बरामद किए गए।
बार एसोसिएशन के प्रवक्ता व सीनियर अधिवक्ता गगन बसोत्रा कहते हैं कि यह बहुत कमजोर सबूत हैं। बरामदगी से पहले ही मुख्य आरोपी पुलिस गिरफ्त में था। आरोपी को 19 जनवरी को ही पकड़ लिया गया था। पीड़िता के नमूने पहले से पुलिस की कस्टडी में थे।
केस की जांच में कई कमियां : बार एसोसिएशन
उनका कहना है कि पुलिस के एएसपी सांबा नवीद पीरजादा ने पहले से ही दौरा कर घटनास्थल पर छानबीन कर ली थी। नवीद को आईजीपी जम्मू के आदेश पर एसआईटी का इंचार्ज बनाया गया था। नाबालिग के शव को 17 जनवरी को रिकवर करने के करीब 15 दिन बाद बाल, खून के धब्बे, गले के हार का हेड, सांझीराम के घर से लकड़ी की हत्थी से तैयार राड बरामद की। बाल को नाबालिग और आरोपी के बाल को मिलाया गया। नई दिल्ली स्थित फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट आई, जिसमें बाल से दोनों के मौके पर होने की पुष्टि हुई। अधिवक्ता बसोत्रा कहते हैं कि फोरेंसिक के इस सबूत को कोर्ट में बहुत मजबूत नहीं माना जाता। क्राइम ब्रांच को इसके साथ कई और ठोस साक्ष्य जुटाने होंगे।
बार एसोसिएशन के उपप्रधान एडवोकेट सचिन गुप्ता और मुनीष चोपड़ा के अनुसार क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट शक पैदा कर रही है। नाबालिग को इंसाफ दिलाने के बजाय केस उलझाया गया है। इंसाफ दिलाने के लिए जांच सही करना क्राइम ब्रांच का फर्ज बनता था। शक के दायरे में पहले से आई क्राइम ब्रांच से केस को सीबीआई को देने की मांग की गई थी। इस चालान पर केस चलेगा तो सही आरोपियों को सजा नहीं मिल पाएगी।
केवल मामले के राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए भाजपा और पीडीपी ने इस मुद्दे को हवा देकर मासूम लड़की से और अत्याचार किया है। उसे इंसाफ दिलाने के लिए ही वकीलों ने आंदोलन किया है।