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कठुआ कांड: मासूम बच्ची की तरह ही खामोश है रसाना, बचे हुए गुज्जर परिवार भी घर छोड़कर चले गए
अजय मीनिया, अमर उजाला, जम्मू
Updated Sun, 15 Apr 2018 05:20 AM IST
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देशभर में चर्चा में आया कठुआ का रसाना गांव जम्मू पठानकोट नेशनल हाइवे से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर है। शनिवार को अमर उजाला ने गांव पहुंचकर फिर इस मामले की पड़ताल की। नेशनल हाइवे के साथ ही झाड़ियों में छुपा जंग खाया हुआ एक बोर्ड लगा है। जिस पर रसाना गांव का नाम लिखा है। 12 से 13 फुट चौड़ी सड़क बनी हुई है।
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आगे बढ़ने पर एक बड़े बड़ वृक्ष के पास बैठे बुजुर्ग दिखे। पूछा कि रसाना अभी और कितना आगे है। बुजुर्ग ने बताया कि थोड़ी ही दूर है। नाम पूछा तो उन्होंने बताया कि वीर पाल नाम है। मेरी यहां जमीन है। मैं दूसरे गांव का हूं। बहुत गलत हो गया है। पता नहीं सच्चाई क्या है। मेरी 70 साल उम्र हो गई है। मैंने कभी ऐसी घटना के बारे नहीं सुना। दरिंदापन किसी ने भी किया हो, लेकिन उनका यह इलाका इसके लिए बहुत शर्मिंदा है। क्राइम ब्रांच भी तो एक ही पक्ष की सुन रहा है।
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वीर पाल से बात करने के बाद आगे बढ़े। सामने देखा कि गुज्जरों के आधा दर्जन कुल्ले बने हुए हैं। वह लोग जा चुके थे। क्योंकि कुल्लों के भीतर कोई सामान नहीं था। इन कुल्लों में नाबालिग बच्ची के रिश्तेदार रहते थे। जो अब यह इलाका छोड़कर चले गए हैं। आगे बढ़े तो सामने एक मंदिर के बाहर दो पुलिस वाले मिले। जो रसाना कांड के बाद यहां स्थायी रूप से तैनात किए गए हैं। इनसे रसाना गांव के बारे पूछा। आगे बढ़ते बढ़ते पूरा गांव क्रास करने के बाद उस देवस्थान पर पहुंचे।
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यहां पर बच्ची के साथ रेप होने का आरोप है। देवस्थान पर भी कोई नहीं मिला। थोड़ा आगे पीछे घूमने पर बच्ची के घर तक पहुंचे। बच्ची का घर भी सुनसान पड़ा था। यहां तक कि रास्ते में कोई नहीं दिखा। रसाना गांव की कहानी ऐसी है कि इस समय सब कुछ विरान पड़ा है। घरों में इक्का दुक्का लोग हैं, जो अंदर दुबक कर बैठे हुए हैं। रसाना कांड को लेकर चल रहे बवाल से सब घबरा चुके हैं। कोई बात करने से भी कतराता है।
दो साल पहले नाबालिग की हुई थी गुज्जरों से लड़ाई
रसाना कांड के मुख्य आरोपी नाबालिग किशोर का दो साल पहले गुज्जरों से झगड़ा भी हो चुका हैं। वह हीरा नगर का रहने वाला है। नाबालिग और उसके तीन दोस्तों की गुज्जर समुदाय के कुछ लोगों से किसी बात को लेकर मारपीट हुई थी। बताया जाता है कि तब यह मामला पुलिस तक भी पहुंचा था। इसके बाद समझौता करा कर मामला रफा दफा करा दिया गया।