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Jammu News: भगवान राम ने 14 बरस का वनवास हंसते हुए कबूल किया
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संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। भागवत चर्चा और प्रभु संकीर्तन में मंगलवार को स्वामी सुध आत्मानंद ने संगत को प्रवचन सुनाए। शास्त्री जी भगवान श्रीराम के चरित्र के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम से ही सीखा जा सकता है कि किस तरह से उन्होंने राजा होने के बाद भी अपना राजपाट त्याग दिया, और पिता के आदेश के मुताबिक 14 बरस का वनवास हंसते-हंसते कबूल कर लिया।
उन्होंने बताया कि श्रीराम भगवान से ही सीखा जा सकता है कि उन्होंने परिवार को एकत्रित रखने के लिए कितना बड़ा बलिदान दिया है। जिस तरह भगवान श्रीराम ने बड़े होने का अहसास दुनिया को कराया है। उसी तरह से हर घर में बड़े पारिवारिक सदस्य की जिम्मेदारी भी उतनी ही बढ़ जाती है और उसे कैसी कठिनाइयों से गुजर कर परिवार को एकत्रित रखना पड़ता है। उन्होंने बताया कि यही सनातन धर्म की पहचान है, जिससे घर को संयुक्त रूप से चलाया जा सकता है। कथा वाचक ने माघ मास का महत्व भी संगत को बताया और किस तरह से माघ मास में रहन सहन और खानपान पर ध्यान रखना चाहिए। उसके बारे में विस्तार से समझाया। चौथे दिन तय समय पर आरती की गई और उसके बाद संगत को प्रसाद वितरित किया गया।
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अरनिया। भागवत चर्चा और प्रभु संकीर्तन में मंगलवार को स्वामी सुध आत्मानंद ने संगत को प्रवचन सुनाए। शास्त्री जी भगवान श्रीराम के चरित्र के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम से ही सीखा जा सकता है कि किस तरह से उन्होंने राजा होने के बाद भी अपना राजपाट त्याग दिया, और पिता के आदेश के मुताबिक 14 बरस का वनवास हंसते-हंसते कबूल कर लिया।
उन्होंने बताया कि श्रीराम भगवान से ही सीखा जा सकता है कि उन्होंने परिवार को एकत्रित रखने के लिए कितना बड़ा बलिदान दिया है। जिस तरह भगवान श्रीराम ने बड़े होने का अहसास दुनिया को कराया है। उसी तरह से हर घर में बड़े पारिवारिक सदस्य की जिम्मेदारी भी उतनी ही बढ़ जाती है और उसे कैसी कठिनाइयों से गुजर कर परिवार को एकत्रित रखना पड़ता है। उन्होंने बताया कि यही सनातन धर्म की पहचान है, जिससे घर को संयुक्त रूप से चलाया जा सकता है। कथा वाचक ने माघ मास का महत्व भी संगत को बताया और किस तरह से माघ मास में रहन सहन और खानपान पर ध्यान रखना चाहिए। उसके बारे में विस्तार से समझाया। चौथे दिन तय समय पर आरती की गई और उसके बाद संगत को प्रसाद वितरित किया गया।
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