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Jammu News: जन-जन तक पहुंची पनुन कश्मीर की आवाज, जल्द होगी एलजी से मुलाकात
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- प्रवासी शिविर जगती में पांच दिवसीय अष्टभैरव जगदंबा महायज्ञ संपन्न
- जम्मू-कश्मीर सहित विभिन्न राज्यों से आए पंडितों ने अलग होमलैंड पर दिया जोर
जम्मू। प्रवासी शिविर जगती में पांच दिवसीय अष्टभैरव जगदंबा महायज्ञ मंगलवार को समाप्त हो गया। जम्मू-कश्मीर के साथ ही देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों कश्मीरी पंडित घरों को लौट गए। आयोजकों का दावा है कि अभियान आह्वान महायज्ञ के जरिये जन-जन तक पनुन कश्मीर और कश्मीर में अलग होमलैंड की आवाज पहुंचाने में कामयाब रहे। जल्द ही एलजी मनोज सिन्हा से मुलाकात कर विभिन्न मांगों से अवगत कराएंगे।
यूथ फॉर पनुन कश्मीर संगठन की ओर से करवाए कार्यक्रम में दिल्ली, मुंबई व अन्य राज्यों से भी कश्मीरी पंडित आए। उज्जैन से पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हवन कुंड में आहुति डालकर महायज्ञ का शुभारंभ किया था। दिन में भजन-कीर्तन, संबोधन, विचार-विमर्श और शाम को हवन-पूजन का दौर चला।
संगठन के महासचिव दिगंबर रैना ने बताया कि अधिक लोगों को समाज से जोड़ने और जन-जन तक आवाज व मांगें पहुंचाने के लिए महायज्ञ का नाम अभियान आह्वान रखा गया था। महायज्ञ में जुटे समाज के अलावा बाहरी लोगों को बताया गया कि कैसे 19 जनवरी 1990 से मातृभूमि कश्मीर से विस्थापन शुरू हुआ और हम अपने ही देश में शरणार्थी बन गए।
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18 जनवरी को हाईवे जाम करने का विचार नहीं था लेकिन अधिकारियों द्वारा वादा करने के बाद भी बात सुनने के लिए कोई नहीं आया तो मजबूरी में सख्त कदम उठाया पड़ा। अहिंसात्मक एवं शांतिपूर्ण तरीके से हाईवे जाम कर अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाई। संगठन ऐसे और आयोजन पनुन कश्मीर और अलग होमलैंड की मांग को मजबूत करने के लिए करेगा।
इसी सप्ताह मिल सकता है समय
वरिष्ठ कश्मीरी पंडित, समाजसेवी एवं ग्लोबल सोलेस सोसायटी के अध्यक्ष पिंटू पंडिता ने बताया कि जल्द ही एलजी मनोज सिन्हा से मुलाकात कर विभिन्न मांगें रखेंगे। इसके लिए लोकभवन से वार्ता चल रही है। उम्मीद है कि इसी सप्ताह समय मिल जाएगा। 30 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में कश्मीरी पंडित समाज से जुड़े विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी एवं वरिष्ठ सदस्य शामिल रहेंगे। सभी लोग 36 वर्ष से विस्थापन का दर्द बताने के साथ ही मुख्य रूप से कश्मीर में अलग होमलैंड की मांग उठाएंगे। कई अन्य मांगें भी उठाई जाएंगी।
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- जम्मू-कश्मीर सहित विभिन्न राज्यों से आए पंडितों ने अलग होमलैंड पर दिया जोर
जम्मू। प्रवासी शिविर जगती में पांच दिवसीय अष्टभैरव जगदंबा महायज्ञ मंगलवार को समाप्त हो गया। जम्मू-कश्मीर के साथ ही देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों कश्मीरी पंडित घरों को लौट गए। आयोजकों का दावा है कि अभियान आह्वान महायज्ञ के जरिये जन-जन तक पनुन कश्मीर और कश्मीर में अलग होमलैंड की आवाज पहुंचाने में कामयाब रहे। जल्द ही एलजी मनोज सिन्हा से मुलाकात कर विभिन्न मांगों से अवगत कराएंगे।
यूथ फॉर पनुन कश्मीर संगठन की ओर से करवाए कार्यक्रम में दिल्ली, मुंबई व अन्य राज्यों से भी कश्मीरी पंडित आए। उज्जैन से पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हवन कुंड में आहुति डालकर महायज्ञ का शुभारंभ किया था। दिन में भजन-कीर्तन, संबोधन, विचार-विमर्श और शाम को हवन-पूजन का दौर चला।
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संगठन के महासचिव दिगंबर रैना ने बताया कि अधिक लोगों को समाज से जोड़ने और जन-जन तक आवाज व मांगें पहुंचाने के लिए महायज्ञ का नाम अभियान आह्वान रखा गया था। महायज्ञ में जुटे समाज के अलावा बाहरी लोगों को बताया गया कि कैसे 19 जनवरी 1990 से मातृभूमि कश्मीर से विस्थापन शुरू हुआ और हम अपने ही देश में शरणार्थी बन गए।
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18 जनवरी को हाईवे जाम करने का विचार नहीं था लेकिन अधिकारियों द्वारा वादा करने के बाद भी बात सुनने के लिए कोई नहीं आया तो मजबूरी में सख्त कदम उठाया पड़ा। अहिंसात्मक एवं शांतिपूर्ण तरीके से हाईवे जाम कर अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाई। संगठन ऐसे और आयोजन पनुन कश्मीर और अलग होमलैंड की मांग को मजबूत करने के लिए करेगा।
इसी सप्ताह मिल सकता है समय
वरिष्ठ कश्मीरी पंडित, समाजसेवी एवं ग्लोबल सोलेस सोसायटी के अध्यक्ष पिंटू पंडिता ने बताया कि जल्द ही एलजी मनोज सिन्हा से मुलाकात कर विभिन्न मांगें रखेंगे। इसके लिए लोकभवन से वार्ता चल रही है। उम्मीद है कि इसी सप्ताह समय मिल जाएगा। 30 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में कश्मीरी पंडित समाज से जुड़े विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी एवं वरिष्ठ सदस्य शामिल रहेंगे। सभी लोग 36 वर्ष से विस्थापन का दर्द बताने के साथ ही मुख्य रूप से कश्मीर में अलग होमलैंड की मांग उठाएंगे। कई अन्य मांगें भी उठाई जाएंगी।