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Jammu News: कश्मीरी पंडित बिलों का नहीं कर पाएंगे भुगतान, फैसला हो वापस
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जगती टेनामेंट कमेटी, सान कश्मीर फ्रंट की शादी लाल की अध्यक्षता में बैठक हुई। उन्होंने कश्मीरी पंडितों की समस्याओं पर मंथन किया।
शादी लाल ने कहा कि सरकार द्वारा प्रवासी शिविरों में बिजली बिलों का भुगतान करने का जो आदेश पारित किया है वह प्रवासियों के साथ अन्याय है। बैठक के बाद जगती बस्ती के प्रवासियों ने बिजली शुल्क भुगतान का विरोध किया और सरकार से आदेश को वापस लेने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि 33 साल से प्रवासियों को घाटी में स्थायी रूप से बसाया नहीं गया जबकि हर कश्मीरी पंडित परिवार को करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ है। सरकार ने प्रवासियों के लिए अस्थायी (अर्जी) राशन कार्ड बनाए हैं, जिस पर दो वक्त की रोटी नहीं खा सकते। जोर देते हुए कहा कि जब तक प्रवासियों को घाटी में नहीं बसाया जाता, तब तक प्रवासी सरकार को फीस नहीं दे सकते। राहत धारकों की मासिक नकद राशि को 13000 से बढ़ाकर 25000 रुपये करने की मांग भी की।
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जम्मू। जगती टेनामेंट कमेटी, सान कश्मीर फ्रंट की शादी लाल की अध्यक्षता में बैठक हुई। उन्होंने कश्मीरी पंडितों की समस्याओं पर मंथन किया।
शादी लाल ने कहा कि सरकार द्वारा प्रवासी शिविरों में बिजली बिलों का भुगतान करने का जो आदेश पारित किया है वह प्रवासियों के साथ अन्याय है। बैठक के बाद जगती बस्ती के प्रवासियों ने बिजली शुल्क भुगतान का विरोध किया और सरकार से आदेश को वापस लेने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि 33 साल से प्रवासियों को घाटी में स्थायी रूप से बसाया नहीं गया जबकि हर कश्मीरी पंडित परिवार को करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ है। सरकार ने प्रवासियों के लिए अस्थायी (अर्जी) राशन कार्ड बनाए हैं, जिस पर दो वक्त की रोटी नहीं खा सकते। जोर देते हुए कहा कि जब तक प्रवासियों को घाटी में नहीं बसाया जाता, तब तक प्रवासी सरकार को फीस नहीं दे सकते। राहत धारकों की मासिक नकद राशि को 13000 से बढ़ाकर 25000 रुपये करने की मांग भी की।
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