केंद्र सरकार से बातचीत लायक माहौल तैयार करने की जुगत में कश्मीरी सियासतदान
जम्मू-कश्मीर में सात दशक तक राजनीति में हावी रहे कश्मीरी सियासतदान मोदी सरकार से बातचीत लायक माहौल तैयार करने की जुगत में है। इसमें पीडीपी से जुड़े लोग भी शामिल हैं। पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 व 35ए के हटने के बाद से कश्मीर केंद्रित राजनीतिक पार्टियों व नेताओं को करारा झटका लगा है।
अब वह इससे उबरने के लिए केंद्र से बातचीत चाहते हैं। दरअसल इसके पीछे अंदर की कहानी यह है कि कश्मीरी नेता चाहते हैं कि केंद्र सरकार से किसी तरह बातचीत का चैनल खुले ताकि कश्मीर में सियासी गतिविधियां दोबारा शुरू हो पाए।
जम्मू कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं सांसद रह चुके मुजफ्फर हुसैन बेग का कहना है कि कश्मीर सियासी बैक ग्राउंड में जा चुका है। जल्द विधानसभा चुनाव होने के भी कोई आसार नहीं है। ऐसे में नजरबंद चल रहे नेताओं की रिहाई का मामला हो या फिर कश्मीर में राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने का यह सब केंद्र सरकार से बातचीत का चैनल खुलने से ही संभव है।
लोग राजनीतिक स्तर पर आगे बढ़ना चाहते हैं
इसके लिए राजनीतिक पार्टी स्तर पर नहीं बल्कि सिविल सोसायटी स्तर पर भी संयम बरतते हुए केंद्र सरकार को यह भरोसा दिलाने की जरूरत है कि जम्मू कश्मीर के लोग राजनीतिक स्तर पर आगे बढ़ना चाहते हैं। प्रदर्शनों से नहीं केवल बातचीत से ही ऐसा संभव हो सकता है और जम्मू कश्मीर के लोगों के हितों जिसमें हिमाचल की तर्ज पर डोमिसाइल अधिकार का मामला हो या फिर स्टेट हुड का मुद्दा। इसके हासिल करने की तरफ आगे बढ़ा जा सकता है।