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Jammu News: पंजाब की सीमाओं पर कथित जबरन वसूली के बीच कश्मीर के मटन व्यापारियों ने पशुओं की आपूर्ति रोकी

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Kashmir mutton traders stop cattle supply amid alleged extortion at Punjab borders
घाटी की मांस आपूर्ति श्रृंखला में पहले से ही व्यवधान पैदा कर रहे एक कदम के तहत कश्मीर के मटन व्यापारियों ने केंद्र शासित प्रदेश के बाहर से जीवित पशुओं का आयात रोक दिया है। यह निर्णय पंजाब में शंभू और माधोपुर सीमा चौकियों पर टोल ठेकेदारों द्वारा कथित जबरन वसूली के जवाब में लिया गया है।
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होलसेल मटन डीलर्स एसोसिएशन के महासचिव मेहराजुद्दीन गनई ने कहा कि यह कदम व्यापक विचार-विमर्श के बाद उठाया गया है। उन्होंने कहा, ''''यह एकतरफा फैसला नहीं है। हमने सभी प्रमुख हितधारकों से बात की है। राजस्थान, सीकर, दिल्ली और अंबाला में हमारे आपूर्तिकर्ताओं को पहले ही सूचित कर दिया गया है।'''' गनई ने कहा कि पंजाब की सीमाओं पर हालात असहनीय हो गए हैं। ट्रक चालकों को सिर्फ गुज़रने के लिए ही अवैध रकम—प्रति वाहन 20,000 रुपये तक—देने पर मजबूर किया जा रहा है। इन अनधिकृत टोलों ने हमारे व्यापार को आर्थिक रूप से अस्थिर बना दिया है। अब गेंद सरकार के पाले में है। जब तक इस जबरन वसूली के खिलाफ सख़्त कार्रवाई नहीं होती हम ऐसी परिस्थितियों में काम नहीं कर सकते।
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इस रोक से कश्मीर में मांस की उपलब्धता और बिगड़ने का ख़तरा है, जहां मटन की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा उत्तरी भारतीय राज्यों से लाए गए पशुओं पर निर्भर करता है। कश्मीर इकनोमिक अलायन्स (केईए) के सह-अध्यक्ष फारूक डार ने मटन व्यापारियों के प्रति पुरज़ोर समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हम उनके साथ हैं। यह सिर्फ़ एक व्यावसायिक मुद्दा नहीं है—यह हमारे क्षेत्र की आर्थिक सेहत का सवाल है। हम कश्मीर की अर्थव्यवस्था के संरक्षक हैं और हम इस मामले को सर्वोच्च स्तर तक उठाएँगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जनता और व्यापारी, दोनों को इस शोषण का नुकसान न हो। डार ने पंजाब सरकार से भी अपील की कि वह तुरंत हस्तक्षेप करे और अपनी सीमाओं पर अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए निर्णायक कदम उठाए।गौरतलब है कि प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री सचिवालय में भी यह मामला उठाया और जम्मू-कश्मीर सरकार से पंजाब सरकार के समक्ष इस मुद्दे को उठाने का आग्रह किया। मेहराजुद्दीन गनई ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से इस आवर्ती समस्या के स्थायी समाधान के लिए बातचीत करने हेतु एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल पंजाब भेजने की अपील की, जिसका नेतृत्व एक कैबिनेट मंत्री कर सके। उन्होंने बताया कि 2016 में तत्कालीन सरकार के तहत भी ऐसा ही कदम उठाया गया था जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए थे। गनई ने कहा, ''''मटन डीलरों को उम्मीद है कि वर्तमान मुख्यमंत्री भी उतनी ही गंभीरता दिखाएंगे और इस मुद्दे को हमेशा के लिए सुलझा लेंगे।'''' उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस तरह की मौजूदा बाधाओं के कारण हजारों लोगों की आजीविका और घाटी में मटन की आपूर्ति खतरे में है।
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