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कश्मीर सुरक्षित, फिल्म निर्माता यहां शूटिंग के लिए आएं: युवराज कपूर
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श्रीनगर में फिल्म निर्देशक युवराज कपूर। अमर उजाला
श्रीनगर। मुंबई से शूटिंग के लिए श्रीनगर पहुंचे बॉलीवुड के फिल्म निर्देशक युवराज कपूर ने फिल्म निर्माताओं से फिर से कश्मीर में फिल्में बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कश्मीर पूरी तरह सुरक्षित है, पहले भी निर्माता यहां फिल्में बनाते रहे हैं, वे फिर से यहां की खूबसूरत वादियों में शूटिंग कर सकते हैं। लोगों को भी यहां घूमने आने से घबराना नहीं चाहिए। यहां के लोग भी अपनी मेहमाननवाजी के लिए मशहूर हैं।
सोमवार को श्रीनगर के प्रेस क्लब में युवराज ने बताया कि वह 10 साल से बॉलीवुड में एक्टिंग, डायरेक्शन कर रहे हैं। कश्मीर में उन्होंने कई फिल्में बनाई हैं। तीन दिन पहले यहां आए और पर्यटक की तरह घूमे। दो दिन पहले डल झील में फिल्म के गाने की शूटिंग की। उन्हें कभी नहीं लगा कि यह जगह असुरक्षित है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली या देश के दूसरे हिस्सों में बैठे लोग सोचते हैं कि यहां आतंकवाद है, लोग सुरक्षित नहीं हैं, मैं उनसे कहना चाहता हूं वे यहां आएं और खुद देखें। यहां चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी हैं, लेकिन उससे भी बड़ी बात है कि यहां के कश्मीरी लोग अच्छे मेहमान नवाज है। यहां की अर्थव्यवस्था ही पर्यटन पर टिकी है।
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एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पहले फिल्मो में यहां की खूबसूरती को दर्शाया जाता था। फिर आया आतंकवाद का दौर, तो उसपर काफी फिल्में बनीं। फिल्में समाज का आइना होती हैं और कई बार वही लोगों की सोचने की क्षमता पर हावी होती हैं। निर्माताओं को फिर से यहां की खूबसूरती और यहां के माहौल पर फिल्में बनानी चाहिए।
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सोमवार को श्रीनगर के प्रेस क्लब में युवराज ने बताया कि वह 10 साल से बॉलीवुड में एक्टिंग, डायरेक्शन कर रहे हैं। कश्मीर में उन्होंने कई फिल्में बनाई हैं। तीन दिन पहले यहां आए और पर्यटक की तरह घूमे। दो दिन पहले डल झील में फिल्म के गाने की शूटिंग की। उन्हें कभी नहीं लगा कि यह जगह असुरक्षित है।
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उन्होंने कहा कि दिल्ली या देश के दूसरे हिस्सों में बैठे लोग सोचते हैं कि यहां आतंकवाद है, लोग सुरक्षित नहीं हैं, मैं उनसे कहना चाहता हूं वे यहां आएं और खुद देखें। यहां चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी हैं, लेकिन उससे भी बड़ी बात है कि यहां के कश्मीरी लोग अच्छे मेहमान नवाज है। यहां की अर्थव्यवस्था ही पर्यटन पर टिकी है।
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एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पहले फिल्मो में यहां की खूबसूरती को दर्शाया जाता था। फिर आया आतंकवाद का दौर, तो उसपर काफी फिल्में बनीं। फिल्में समाज का आइना होती हैं और कई बार वही लोगों की सोचने की क्षमता पर हावी होती हैं। निर्माताओं को फिर से यहां की खूबसूरती और यहां के माहौल पर फिल्में बनानी चाहिए।