भारत के इस शहर में नहीं है एक भी सिनेमा हॉल
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रियासत सरकार कश्मीर घाटी को बॉलीवुड की पसंदीदा स्थल बनाने में जुटी है। कश्मीर को जहां ‘आल सीजन टूरिस्ट डेस्टिनेशन’ बनाने की कवायद शुरू की गई है, वहीं गुलमर्ग को ‘भारत का दावोस’ बनाने की कोशिश है।
यदि ऐसा होता है कि पूरी दुनिया कश्मीर की हसीन वादियों से फिर से रूबरू होगी। लेकिन अफसोस यह है कि कश्मीर में बड़े पर्दे पर खुद कश्मीर वाले इसे नहीं देख पाएंगे। मौजूदा समय में घाटी में एक भी सिनेमा नहीं है।
घाटी के लोगों को इसका मलाल रहता है कि अपने ही कश्मीर को बड़े पर्दे पर नहीं देख सकते। वर्ष 1989 से पहले कश्मीर में 13 सिनेमा हाल थे। जब आतंकवाद का दौर शुरू हुआ तो ये बंद हो गए।
इसके बाद से लगातार कश्मीर में सिनेमा हाल को शुरू करने के प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिली। दो साल पहले जब घाटी में हैदर फिल्म की शूटिंग हुई तो कश्मीर के लोगों को फिल्म न देखने का मलाल रहा।
आतंकवाद के दौरान आतंकियों ने सिनेमा घरों को निशाना बनाया। घाटी में सिनेमा पर एक तरह से आतंकियों ने प्रतिबंध लगा दिया।
पांच साल पहले बंद हो गया था नीलम सिनेमा
कश्मीर में एक मात्र सिनेमाहाल भी 25 मई 2010 को बंद हो गया। यह सिनेमा कश्मीर में सेना की देखरेख और सुरक्षा में चलता था। लेकिन उक्त तारीख को यह सिनेमा भी बंद हो गया। इसके बाद से अब घाटी में कोई सिनेमा नहीं है।
नोगाम के कारोबारी अब्दुल मजीद का कहना है कि घाटी में सिनेमा का कारोबार खूब दौड़ सकता है। लेकिन कोई प्रयास नहीं हो रहा। 60 से 80 तक के दशकों में जहां सिनेमा में लगने वाली हर फिल्म में जबर्दस्त भीड़ होती थी। इन दशकों में अधिकतर फिल्में कश्मीर में बनी।
कश्मीर में पिछले कुछ सालों में यह जवानी है दिवानी, हैदर, जब तक है जान की शूटिंग हुई। इन फिल्मों में कश्मीर की खूबसूरती से पूरी दुनिया वाकिफ हुई। अंग्रेजी पीजी करने वाले आदिल हुसैन का कहना है कि जो लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, वह फिल्म डाउनलोड कर लेते हैं। लेकिन सब ऐसा नहीं कर सकते। यदि सिनेमा हो तो सब देख सकते हैं।