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हालात सामान्य होते तो हिमाचल प्रदेश से दोगुना विकसित होता जम्मू कश्मीर

Wed, 11 Jan 2017 12:00 PM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू Updated Wed, 11 Jan 2017 12:00 PM IST
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KASHMIR DEVELOPMENT BREAKS DOWN DUE TO VOILENCE
Kashmir Tourism - फोटो : File Photo

आतंकवाद और हिंसा के कारण जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था पटरी से उतर गई है। विकास की दौड़ में पड़ोसी राज्यों हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और हरियाणा की तुलना में रियासत बहुत पीछे छूटती जा रही है। अगले वित्तीय वर्ष के आर्थिक सर्वे ने रियासत के पिछड़ेपन के लिए अशांति को जिम्मेदार ठहराया है।

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सर्वे ने रेखांकित किया है कि आमतौर पर कश्मीर संकट की खूब चर्चा होती है, लेकिन रियासत के लोगों को हिंसा की कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है, यह तथ्य भुला दिया जाता है। हिंसा से पर्यटन और अन्य व्यवसाय ठप होता है जो बेरोजगारी बढ़ाती है।
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अभी रोजगार कार्यालयों में 111077 नाम दर्ज हैं, लेकिन वास्तव बेरोजगारों की संख्या ढाई लाख से ज्यादा है। अलगाववादियों के बंद और हड़ताल विकास रथ के पहिये को रोक रहे हैं। सर्वे का आकलन है कि अगर अमन होता तो हिमाचल की तुलना में जम्मू-कश्मीर का विकास दोगुना होता।  

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हिंसा से रूका कश्मीर का विकास

KASHMIR DEVELOPMENT BREAKS DOWN DUE TO VOILENCE
कश्मीर में हिंसा - फोटो : PTI

पिछले साल की हिंसा ने रियासत की आर्थिक सेहत की कमर तोड़ दी। अर्थव्यवस्था की रीढ़ समझे जाने वाले पर्यटन और अन्य औद्योगिक-व्यावसायिक गतिविधियों पर ब्रेक लग गया। हिंसा की पृष्ठभूमि में विकास की डगर बेहद पथरीली है, लेकिन आर्थिक सर्वे ने अगले वित्तीय वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद में 7.79 प्रतिशत का अनुमान लगाया है।

प्रति व्यक्ति आय में रियासत वर्तमान में सभी पड़ोसी राज्यों और राष्ट्रीय औसत से पिछड़ा है। अब नए वित्तीय वर्ष में इसमें बढ़ोतरी का अनुमान है। आकलन है कि प्रति व्यक्ति आय 74580 रुपये से बढ़कर 95361 रुपये हो जाएगी। इस बढ़ोतरी के बाद भी रियासत पड़ोसी राज्यों से पिछड़ा ही रहेगा और आतंकवाद इस सुखद अनुमान पर पानी फेर सकता है। 

सर्वे रिपोर्ट कहती है कि कश्मीर में लगभग 15 वर्षों तक आतंकवाद के दौर के बाद 2002 से 2007 तक कुछ शांति रही। फिर 2008 में अमरनाथ भूमि विवाद, शोपियां में बलात्कार और हत्या के बाद हिंसा ने नुकसान पहुंचाया। 2010 में फिर हिंसा भड़की और पिछले साल आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद 5 महीने माहौल अराजक बन गया।

इस तरह ढाई दशक के हिंसक दौर ने निजी निवेश को भी रोका। हिमाचल और जम्मू कश्मीर दोनों पहाड़ी राज्य हैं लेकिन हिमाचल की तुलना में रियासत का सकल घरेलू उत्पाद 4123 करोड़ रुपये कम है। हिमाचल का ज्यादा विकास हुआ, जबकि वह आबादी और क्षेत्रफल में रियासत से 45 प्रतिशत कम है। 


 

पर्यटन की तुलना में पिछड़ा जम्मू कश्मीर

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पर्यटन की तुलना में पिछड़ा जम्मू कश्मीर - फोटो : File Photo
पर्यटन में भी जम्मू कश्मीर लगातार हिमाचल से पिछड़ रहा है। हिंसा और आतंकवाद के कारण पर्यटक जम्मू कश्मीर की तुलना में हिमाचल को अधिक महत्व देने लगे हैं।

जम्मू कश्मीर में 2014 में 95.25 लाख और 2015 में  92.03 लाख पर्यटक आए, जबकि हिमाचल में 2015 में 175.31 लाख और 2014 में 163.14 लाख पर्यटकों की आमद रही।

इस तरह जम्मू कश्मीर पर्यटकों की संख्या के मामले में हिमाचल से 2015 में 83.28 लाख और 2014 में 67.89 लाख पीछे रहा। 
 

बिजली उत्पादन में भी पीछे है जम्मू कश्मीर

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बिजली उत्पादन में भी पीछे है जम्मू कश्मीर - फोटो : डेमो फोटो

हिमाचल ने बिजली उत्पादन के क्षेत्र में अपनी क्षमता का 32 प्रतिशत दोहन किया है, जबकि जम्मू-कश्मीर में कुल 16 प्रतिशत क्षमता का ही उपयोग हो पाया है। जम्मू कश्मीर में 86 बड़े और मध्यम उद्योग हैं, जिससे 19314 लोगों को रोजगार मिला है ।

जबकि हिमाचल में 503 उद्योगों ने 60908 लोगों को रोजगार मुहैया कराया है। 2012 से 2016 तक हिमाचल का ग्रोथ ट्रेंड 6.41 से 7.72 रहा, जबकि जम्मू कश्मीर में यह 2014 -15 में यह ट्रेंड -0.96 पर ही सिमट गया। 

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